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	<title>هر لحظه با اخبار فناوری،بازاریابی دیجیتال</title>
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<item rdf:about="https://yi.kowsarblog.ir/پایان-نامه-آماده-کارشناسی-ارشد-n-فصل-دوم-nn3">
	<title>پایان نامه آماده کارشناسی ارشد – فصل دوم – 3</title>
	<link>https://yi.kowsarblog.ir/پایان-نامه-آماده-کارشناسی-ارشد-n-فصل-دوم-nn3</link>
	<dc:date>1401-09-23T08:14:00Z</dc:date>	<dc:creator>نویسنده محمدی</dc:creator>
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&lt;div&gt;
&lt;p&gt;توصیف رابطه هوش هیجانی و سرسختی روانشناختی با رضایت زناشوئی می‌باشد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;img src=&#039;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/02/Intelligence-243.jpg&#039; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href=&#039;https://nefo.ir/&#039;&gt; &lt;img src=&#039;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/10/THESIS-PAPER-2.png&#039; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;اهداف فرعی&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;توصیف رابطه بین هوش هیجانی و رضایت زناشوئی&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt;&lt;img src=&#039;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/02/Emotional-Intelligence-33.jpg&#039; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;توصیف رابطه بین سرسختی روانشناختی و رضایت زناشوئی.&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;تبیین و پیش‌بینی رضایت زناشوئی بر اساس هوش هیجانی و سرسختی روانشناختی.&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;بررسی تفاوت در میزان هوش هیجانی در معلمان مرد و زن.&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;بررسی تفاوت در میزان سرسختی روانشناسی در معلمان مرد و زن.&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;بررسی تفاوت در میزان رضایت زناشوئی در معلمان مرد و زن.&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;سؤالات تحقیق:&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;آیا بین هوش هیجانی و رضایت زناشوئی رابطه وجود دارد؟&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt;&lt;img src=&#039;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/02/Intelligence-566.jpg&#039; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;آیا بین سرسختی روانشناختی و رضایت زناشوئی رابطه وجود دارد ؟&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;آیا بین میزان تاثیر هوش هیجانی و سرسختی روانشناختی بر رضایت زناشوئی تفاوت وجود دارد؟&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;آیا هوش هیجانی و سرسختی روانشناختی قدرت پیش‌بینی کنندگی رضایت زناشوئی را دارند؟&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;آیا بین میزان رضایت زناشویی معلمان مرد و زن تفاوت وجود دارد ؟&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;فرضیه ‏های تحقیق:&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;بین هوش هیجانی و رضایت زناشوئی معلمان رابطه وجود دارد.&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;بین سرسختی روانشناختی و رضایت زناشوئی معلمان رابطه وجود دارد .&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;بین میزان رضایت زناشوئی معلمان مرد و زن تفاوت وجود دارد.&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;بین میزان هوش هیجانی معلمان مرد و زن تفاوت وجود دارد.&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;بین میزان سرسختی روانشناختی معلمان مرد و زن تفاوت وجود دارد.&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;هوش هیجانی و سرسختی روانشناختی قدرت پیش‌بینی کنندگی رضایت زناشوئی را دارند.&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;تعریف مفهومی و عملیاتی متغیرها&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;هوش هیجانی&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;تعریف مفهومی: بار-ان(۲۰۰۰)مدلی چند عاملی برای هوش تدوین ‌کرده‌است.وی معتقد است که هوش هیجانی مجموعه ای از توانایی ها ،قابلیت ها و مهارتهایی است که فرد را برای سازگاری مؤثر با محیط و کسب موفقیت در زندگی تجهیز می‌کند.و صفت هیجانی در این نوع هوش رکن اساسی است که آن را از هوش هیجانی شناختی متمایز می‌کند.از دیدگاه بار-ان هوش هیجانی دارای ابعاد ۱۵گانه است.از نظر وی هوش هیجانی ، مهارت‌های هیجانی و اجتماعی طی زمان رشد وتغیر می‌کند و می توان با آموزش وبرنامه های اصلاحی مانند برنامه های درمانی آن ها را بهبود بخشید(ناظم،۱۳۸۶).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;img src=&#039;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2022/11/pics_23_50.png&#039; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;img src=&#039;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/02/Sociology-196.jpg&#039; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;سرسختی روانشناختی&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;سرسختی روان شناختی دارای سه مؤلفه‌ اساسی شامل کنترل ( قابلیت کنترل کردن موقعیت های متنوع زندگی)، تعهد (تمایل به در گیر شدن، برخلاف دور شدن از انجام کاری) و چالش (قابلیت درک اینکه تغییرات در زندگی چیزی طبیعی است) می‌باشد (هورسبرگ، شرمر، وسلکا و ورنان&lt;sup&gt;[۱]&lt;/sup&gt;، ۲۰۰۸).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;رضایت زناشوئی&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;رضایت زناشوئی احساسات عینی از خشنودی، رضایت و لذت تجربه شده توسط زن و شوهر را می‌گویند، رضایتمندی زناشوئی در واقع نگرش مثبت و لذت بخش است که زن وشوهر از جنبه‌های مختلف روابط زناشوئی دارند(سلیمانیان، ۱۳۷۳).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;رضایت زناشویی حالتی از رضایت مندی در ازدواج است که به وسیله ی ادراک درون فردی )واکنش تجربه شده درونی ( یا یک ادراک بین شخصی ) سازش بین انتظارات یکی و رفتار دیگری ( تعریف می شود، تمرکز رضایت زناشویی به احتمال زیاد، بر رضایتمندی از فرصت ها، تصمیم گیری ها، درآمد، سبک زندگی، ارتباط، رابطه ی جنسی یا دوستان است. بدین لحاظ رضایت از رابطه ی زناشویی را یک مفهوم چندبعدی می دانند که عوامل گوناگونی ر ا در بر می‌گیرد و مجموعه ی این عوامل در رضایت یا خشنودی کلی از روابط نقش دارند. ازجمله ی این عوامل را می توان برآوردن انتظارات و نیازهای مادی و عینی، عاطفی، اجتماعی، اقتصادی و بسیاری مسایل دیگر دانست(رضویه، معین و بهلولی اصل، ۱۳۸۹).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;img src=&#039;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/02/Investment-Economics-64.jpg&#039; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;تعریف عملیاتی مفاهیم&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;هوش هیجانی:&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در این پژوهش منظور از هوش هیجانی نمره ای است که فرد در آزمون۳۳سوالی سیبریا شرینگ کسب می‌کند.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;مؤلفه های هوش هیجانی&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;خود آگاهی یا آگاهی از هیجانات خود&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;تعریف مفهومی:خود آگاهی توانایی شناخت احساسات ،نقاط ضعف و قوت خویش وعوامل به وجود آورنده نوع احساسات می‌باشد(گلمن،۱۳۸۰).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;تعریف عملیاتی:در این پژوهش منظور از خود آگاهی نمره ای است که فرد در آزمون سیبریاشرینگ (سوالات۶-۱۰-۱۲-۱۴-۲۴-۲۷-۳۲-۳۳)کسب می‌کند.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;خود کنترلی یا مدیریت خود&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;تعریف مفهومی:خود کنترلی توانایی ابراز احساسات است ،به طوری که جریان تفکر و ارتباطات سالم را ممکن می‌سازد(گلمن،۱۳۸۰)&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;تعریف عملیاتی:در این پژوهش منظور از خود کنترلی نمره ای است که فرد در آزمون سیبریا شرینگ (سوالات ۲-۵-۱۱-۱۶-۱۸-۲۳-۳۰)کسب می‌کند.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;خود انگیختگی&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;تعریف مفهومی:خودانگیختگی شامل مسئولیت ،توانایی تمرکز بر تکلیف در دست انجام و عطف توجه وکاهش تکانشگری و افزایش خویشتن پنداری می‌باشد(گلمن،۱۳۸۰).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;افراد خود انگیخته ارضاء و سرکوب خواسته ها را به تعویق می اندازند،اغلب به تکمیل یک عمل می پردازند ،اهمال کاری نمی کنند و زمان را هدر نمی دهند.آن ها همواره در تکاپو هستند و تمایل دارند همواره مولد و مؤثر باشند.(گلمن،۱۳۸۰)&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;تعریف عملیاتی:در این پژوهش منظور از خود انگیختگی نمره ای است که فرد در آزمون سیبریاشرینگ (سوالات ۱-۹-۱۵-۲۰-۲۱-۲۶-۳۱) کسب می‌کند.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;همدلی&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;تعریف مفهومی:همدلی احساس مهارت روابط مردمی است.فرد همدل با سر نخهای ظریف اجتماعی وتعامل هایی که بیانگر نیازها و خواسته های دیگران باشند،مأنوس وآشنا هستند این مهارت‌ها افراد را در حیطه آموزشی ، حرفه -ای و مدیریت توانمند می‌سازد(گلمن،۱۳۸۰).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;تعریف عملیاتی:در این پژوهش منظور از همدلی نمره ای است که فرد در آزمون سیبریاشرینگ (سوالات ۳-۴-۱۷-۲۲-۲۵-۲۹)کسب می‌کند.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;مهارت‌های اجتماعی یا تنظیم روابط بین فردی&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;تعریف مفهومی:مهارت‌های اجتماعی توانایی مدیریت روابط خود با دیگران می‌باشد همچنین با جنبه‌های ذاتی رهبری ارتباط دارد(گلمن،۱۳۸۰).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;تعریف عملیاتی:در این پژوهش منظور از مهارت‌های اجتماعی نمره ای است که فرد در آزمون سیبریاشرینگ (سوالات ۷-۸-۱۳-۱۹-۲۱-۳۰) کسب می‌کند.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;رضایت زناشوئی:&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;منظور از رضایت زناشوئی در پژوهش حاضر نمره ای است که آزمودنی در آزمون رضایت زناشوئی اینریچ کسب می‌کند.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;سرسختی روانشناختی:&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;منظور از سرسختی روانشناختی در پژوهش حاضر نمره ای است که آزمودنی در آزمون سرسختی اهواز کسب می‌کند.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;h1&gt;فصل دوم&lt;/h1&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;پیشینه و ادبیات تحقیق&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div class=&quot;item_footer&quot;&gt;&lt;p&gt;&lt;small&gt;&lt;a href=&quot;https://yi.kowsarblog.ir/پایان-نامه-آماده-کارشناسی-ارشد-n-فصل-دوم-nn3&quot;&gt;مطلب اصلی&lt;/a&gt; در &lt;a href=&quot;http://kowsarblog.ir/&quot;&gt;کوثربلاگ &lt;/a&gt;ارسال شده است.&lt;/small&gt;&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;</description>
	<content:encoded><![CDATA[<div class='story' data-id='1557162154' data-words='871' id='story'>
<div>
<p>توصیف رابطه هوش هیجانی و سرسختی روانشناختی با رضایت زناشوئی می‌باشد.</p>
<p><img src='https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/02/Intelligence-243.jpg' /></p>
<p><a href='https://nefo.ir/'> <img src='https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/10/THESIS-PAPER-2.png' /></a></p>
<p><strong>اهداف فرعی</strong></p>
<p> </p>
<ol>
<li>
<ol>
<li>توصیف رابطه بین هوش هیجانی و رضایت زناشوئی</li>
</ol>
</li>
</ol>
<p><img src='https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/02/Emotional-Intelligence-33.jpg' /></p>
<p> </p>
<ol>
<li>
<ol>
<li>توصیف رابطه بین سرسختی روانشناختی و رضایت زناشوئی.</li>
</ol>
</li>
</ol>
<p> </p>
<ol>
<li>
<ol>
<li>تبیین و پیش‌بینی رضایت زناشوئی بر اساس هوش هیجانی و سرسختی روانشناختی.</li>
</ol>
</li>
</ol>
<p> </p>
<ol>
<li>
<ol>
<li>بررسی تفاوت در میزان هوش هیجانی در معلمان مرد و زن.</li>
</ol>
</li>
</ol>
<p> </p>
<ol>
<li>
<ol>
<li>بررسی تفاوت در میزان سرسختی روانشناسی در معلمان مرد و زن.</li>
</ol>
</li>
</ol>
<p> </p>
<ol>
<li>بررسی تفاوت در میزان رضایت زناشوئی در معلمان مرد و زن.</li>
</ol>
<p> </p>
<p> </p>
<p><strong>سؤالات تحقیق:</strong></p>
<p> </p>
<ol>
<li>
<ol>
<li>آیا بین هوش هیجانی و رضایت زناشوئی رابطه وجود دارد؟</li>
</ol>
</li>
</ol>
<p><img src='https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/02/Intelligence-566.jpg' /></p>
<p> </p>
<ol>
<li>
<ol>
<li>آیا بین سرسختی روانشناختی و رضایت زناشوئی رابطه وجود دارد ؟</li>
</ol>
</li>
</ol>
<p> </p>
<ol>
<li>
<ol>
<li>آیا بین میزان تاثیر هوش هیجانی و سرسختی روانشناختی بر رضایت زناشوئی تفاوت وجود دارد؟</li>
</ol>
</li>
</ol>
<p> </p>
<ol>
<li>
<ol>
<li>آیا هوش هیجانی و سرسختی روانشناختی قدرت پیش‌بینی کنندگی رضایت زناشوئی را دارند؟</li>
</ol>
</li>
</ol>
<p> </p>
<ol>
<li>آیا بین میزان رضایت زناشویی معلمان مرد و زن تفاوت وجود دارد ؟</li>
</ol>
<p><strong>فرضیه ‏های تحقیق:</strong></p>
<p> </p>
<ol>
<li>
<ol>
<li>بین هوش هیجانی و رضایت زناشوئی معلمان رابطه وجود دارد.</li>
</ol>
</li>
</ol>
<p> </p>
<ol>
<li>
<ol>
<li>بین سرسختی روانشناختی و رضایت زناشوئی معلمان رابطه وجود دارد .</li>
</ol>
</li>
</ol>
<p> </p>
<ol>
<li>
<ol>
<li>بین میزان رضایت زناشوئی معلمان مرد و زن تفاوت وجود دارد.</li>
</ol>
</li>
</ol>
<p> </p>
<ol>
<li>
<ol>
<li>بین میزان هوش هیجانی معلمان مرد و زن تفاوت وجود دارد.</li>
</ol>
</li>
</ol>
<p> </p>
<ol>
<li>
<ol>
<li>بین میزان سرسختی روانشناختی معلمان مرد و زن تفاوت وجود دارد.</li>
</ol>
</li>
</ol>
<p> </p>
<ol>
<li>هوش هیجانی و سرسختی روانشناختی قدرت پیش‌بینی کنندگی رضایت زناشوئی را دارند.</li>
</ol>
<p> </p>
<p> </p>
<p><strong>تعریف مفهومی و عملیاتی متغیرها</strong></p>
<p> </p>
<p><strong>هوش هیجانی</strong></p>
<p> </p>
<p>تعریف مفهومی: بار-ان(۲۰۰۰)مدلی چند عاملی برای هوش تدوین ‌کرده‌است.وی معتقد است که هوش هیجانی مجموعه ای از توانایی ها ،قابلیت ها و مهارتهایی است که فرد را برای سازگاری مؤثر با محیط و کسب موفقیت در زندگی تجهیز می‌کند.و صفت هیجانی در این نوع هوش رکن اساسی است که آن را از هوش هیجانی شناختی متمایز می‌کند.از دیدگاه بار-ان هوش هیجانی دارای ابعاد ۱۵گانه است.از نظر وی هوش هیجانی ، مهارت‌های هیجانی و اجتماعی طی زمان رشد وتغیر می‌کند و می توان با آموزش وبرنامه های اصلاحی مانند برنامه های درمانی آن ها را بهبود بخشید(ناظم،۱۳۸۶).</p>
<p><img src='https://ziso.ir/wp-content/uploads/2022/11/pics_23_50.png' /></p>
<p><img src='https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/02/Sociology-196.jpg' /></p>
<p><strong>سرسختی روانشناختی</strong></p>
<p> </p>
<p>سرسختی روان شناختی دارای سه مؤلفه‌ اساسی شامل کنترل ( قابلیت کنترل کردن موقعیت های متنوع زندگی)، تعهد (تمایل به در گیر شدن، برخلاف دور شدن از انجام کاری) و چالش (قابلیت درک اینکه تغییرات در زندگی چیزی طبیعی است) می‌باشد (هورسبرگ، شرمر، وسلکا و ورنان<sup>[۱]</sup>، ۲۰۰۸).</p>
<p> </p>
<p><strong>رضایت زناشوئی</strong></p>
<p> </p>
<p>رضایت زناشوئی احساسات عینی از خشنودی، رضایت و لذت تجربه شده توسط زن و شوهر را می‌گویند، رضایتمندی زناشوئی در واقع نگرش مثبت و لذت بخش است که زن وشوهر از جنبه‌های مختلف روابط زناشوئی دارند(سلیمانیان، ۱۳۷۳).</p>
<p> </p>
<p>رضایت زناشویی حالتی از رضایت مندی در ازدواج است که به وسیله ی ادراک درون فردی )واکنش تجربه شده درونی ( یا یک ادراک بین شخصی ) سازش بین انتظارات یکی و رفتار دیگری ( تعریف می شود، تمرکز رضایت زناشویی به احتمال زیاد، بر رضایتمندی از فرصت ها، تصمیم گیری ها، درآمد، سبک زندگی، ارتباط، رابطه ی جنسی یا دوستان است. بدین لحاظ رضایت از رابطه ی زناشویی را یک مفهوم چندبعدی می دانند که عوامل گوناگونی ر ا در بر می‌گیرد و مجموعه ی این عوامل در رضایت یا خشنودی کلی از روابط نقش دارند. ازجمله ی این عوامل را می توان برآوردن انتظارات و نیازهای مادی و عینی، عاطفی، اجتماعی، اقتصادی و بسیاری مسایل دیگر دانست(رضویه، معین و بهلولی اصل، ۱۳۸۹).</p>
<p><img src='https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/02/Investment-Economics-64.jpg' /></p>
<p> </p>
<p> </p>
<p><strong>تعریف عملیاتی مفاهیم</strong></p>
<p> </p>
<p>هوش هیجانی:</p>
<p> </p>
<p>در این پژوهش منظور از هوش هیجانی نمره ای است که فرد در آزمون۳۳سوالی سیبریا شرینگ کسب می‌کند.</p>
<p> </p>
<p><strong>مؤلفه های هوش هیجانی</strong></p>
<p> </p>
<p><strong>خود آگاهی یا آگاهی از هیجانات خود</strong></p>
<p> </p>
<p>تعریف مفهومی:خود آگاهی توانایی شناخت احساسات ،نقاط ضعف و قوت خویش وعوامل به وجود آورنده نوع احساسات می‌باشد(گلمن،۱۳۸۰).</p>
<p> </p>
<p>تعریف عملیاتی:در این پژوهش منظور از خود آگاهی نمره ای است که فرد در آزمون سیبریاشرینگ (سوالات۶-۱۰-۱۲-۱۴-۲۴-۲۷-۳۲-۳۳)کسب می‌کند.</p>
<p> </p>
<p><strong>خود کنترلی یا مدیریت خود</strong></p>
<p> </p>
<p>تعریف مفهومی:خود کنترلی توانایی ابراز احساسات است ،به طوری که جریان تفکر و ارتباطات سالم را ممکن می‌سازد(گلمن،۱۳۸۰)</p>
<p> </p>
<p>تعریف عملیاتی:در این پژوهش منظور از خود کنترلی نمره ای است که فرد در آزمون سیبریا شرینگ (سوالات ۲-۵-۱۱-۱۶-۱۸-۲۳-۳۰)کسب می‌کند.</p>
<p> </p>
<p><strong>خود انگیختگی</strong></p>
<p> </p>
<p>تعریف مفهومی:خودانگیختگی شامل مسئولیت ،توانایی تمرکز بر تکلیف در دست انجام و عطف توجه وکاهش تکانشگری و افزایش خویشتن پنداری می‌باشد(گلمن،۱۳۸۰).</p>
<p> </p>
<p>افراد خود انگیخته ارضاء و سرکوب خواسته ها را به تعویق می اندازند،اغلب به تکمیل یک عمل می پردازند ،اهمال کاری نمی کنند و زمان را هدر نمی دهند.آن ها همواره در تکاپو هستند و تمایل دارند همواره مولد و مؤثر باشند.(گلمن،۱۳۸۰)</p>
<p> </p>
<p>تعریف عملیاتی:در این پژوهش منظور از خود انگیختگی نمره ای است که فرد در آزمون سیبریاشرینگ (سوالات ۱-۹-۱۵-۲۰-۲۱-۲۶-۳۱) کسب می‌کند.</p>
<p> </p>
<p><strong>همدلی</strong></p>
<p> </p>
<p>تعریف مفهومی:همدلی احساس مهارت روابط مردمی است.فرد همدل با سر نخهای ظریف اجتماعی وتعامل هایی که بیانگر نیازها و خواسته های دیگران باشند،مأنوس وآشنا هستند این مهارت‌ها افراد را در حیطه آموزشی ، حرفه -ای و مدیریت توانمند می‌سازد(گلمن،۱۳۸۰).</p>
<p> </p>
<p>تعریف عملیاتی:در این پژوهش منظور از همدلی نمره ای است که فرد در آزمون سیبریاشرینگ (سوالات ۳-۴-۱۷-۲۲-۲۵-۲۹)کسب می‌کند.</p>
<p> </p>
<p><strong>مهارت‌های اجتماعی یا تنظیم روابط بین فردی</strong></p>
<p> </p>
<p>تعریف مفهومی:مهارت‌های اجتماعی توانایی مدیریت روابط خود با دیگران می‌باشد همچنین با جنبه‌های ذاتی رهبری ارتباط دارد(گلمن،۱۳۸۰).</p>
<p> </p>
<p>تعریف عملیاتی:در این پژوهش منظور از مهارت‌های اجتماعی نمره ای است که فرد در آزمون سیبریاشرینگ (سوالات ۷-۸-۱۳-۱۹-۲۱-۳۰) کسب می‌کند.</p>
<p> </p>
<p><strong>رضایت زناشوئی:</strong></p>
<p> </p>
<p>منظور از رضایت زناشوئی در پژوهش حاضر نمره ای است که آزمودنی در آزمون رضایت زناشوئی اینریچ کسب می‌کند.</p>
<p> </p>
<p><strong>سرسختی روانشناختی:</strong></p>
<p> </p>
<p>منظور از سرسختی روانشناختی در پژوهش حاضر نمره ای است که آزمودنی در آزمون سرسختی اهواز کسب می‌کند.</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<h1>فصل دوم</h1>
<p> </p>
<p><strong>پیشینه و ادبیات تحقیق</strong></p>
<p> </p>
</div>
</div><div class="item_footer"><p><small><a href="https://yi.kowsarblog.ir/پایان-نامه-آماده-کارشناسی-ارشد-n-فصل-دوم-nn3">مطلب اصلی</a> در <a href="http://kowsarblog.ir/">کوثربلاگ </a>ارسال شده است.</small></p></div>]]></content:encoded>
			</item>

<item rdf:about="https://yi.kowsarblog.ir/فایل-های-مقالات-و-پروژه-ها-۴-۴-۱-آزمون-تی-t-دو-جامعه-مستقل">
	<title>فایل های مقالات و پروژه ها | ۴-۴-۱) آزمون تی(T) دو جامعه مستقل و من- ویتنی (آزمون U) – 8</title>
	<link>https://yi.kowsarblog.ir/فایل-های-مقالات-و-پروژه-ها-۴-۴-۱-آزمون-تی-t-دو-جامعه-مستقل</link>
	<dc:date>1401-09-23T08:14:00Z</dc:date>	<dc:creator>نویسنده محمدی</dc:creator>
	<dc:subject>بدون موضوع</dc:subject>
		<description>&lt;div class=&#039;story&#039; data-id=&#039;1557099637&#039; data-words=&#039;952&#039; id=&#039;story&#039;&gt;
&lt;div&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;۴-۳-۲-۲- فرضیه فرعی دوم&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;فرضیه فرعی دوم تحقیق به صورت زیر بیان شده است:&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;فرضیه فرعی دوم: بین مسخ شخصیت با عملکرد سازمانی در کارکنان صف بانک سپه استان قم ارتباط معناداری وجود دارد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;شکل ریاضی فرض آماری به صورت زیر است:&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;H&lt;sub&gt;0&lt;/sub&gt;: ρ = ۰&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;۰ H&lt;sub&gt;1&lt;/sub&gt; : ρ ≠&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;بین مسخ شخصیت و عملکرد سازمانی رابطه وجود ندارد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;بین مسخ شخصیت و عملکرد سازمانی رابطه وجود دارد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;آزمون فرضیه&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در جدول (۴-۸) نتایج محاسبه ضریب همبستگی بین مسخ شخصیت و عملکرد سازمانی ارائه گردیده است:&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;جدول(۴-۸): مقادیر ضریب همبستگی&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;فرضیه&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
&lt;strong&gt;تعداد&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
&lt;strong&gt;نوع آزمون&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
&lt;strong&gt;ضریب همبستگی&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
&lt;strong&gt;Sig&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
&lt;strong&gt;نتیجه آزمون&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
&lt;strong&gt;رابطه مسخ شخصیت و عملکرد سازمانی&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;۱۴۳&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;اسپیرمن&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;۰٫۴۳۶-&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;۰٫۰۰۰&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;تأیید فرضیه&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;همان طور که در جدول (۴-۸) دیده می­ شود با انجام آزمون اسپیرمن در سطح اطمینان ۹۵ درصد، مقدار ۰٫۰۰۰Sig = به دست آمد. چون مقدار ۰٫۰۵ Sig&amp;lt; می‌باشد، لذا فرض صفر رد و فرض مقابل را می‌پذیریم. یعنی رابطه‌ معناداری بین مسخ شخصیت و عملکرد سازمانی وجود دارد. و از آنجا که میزان ضریب همبستگی اسپیرمن برای این آزمون ۰٫۴۳۶- می‌باشد، لذا نوع رابطه منفی می‌باشد. بدین ترتیب فرضیه فرعی دوم تحقیق در سطح اطمینان ۹۵% تأیید می‌گردد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;img src=&#039;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2022/11/pics_9_50.png&#039; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href=&#039;https://shivadanesh.ir/&#039;&gt; &lt;img src=&#039;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/10/THESIS-PAPER-3.png&#039; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;۴-۳-۲-۳- فرضیه فرعی سوم&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;فرضیه فرعی سوم تحقیق به صورت زیر بیان شده است:&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;فرضیه فرعی سوم: بین کاهش موفقیت فردی با عملکرد سازمانی در کارکنان صف بانک سپه استان قم ارتباط معناداری وجود دارد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;شکل ریاضی فرض آماری به صورت زیر است:&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;H&lt;sub&gt;0&lt;/sub&gt;: ρ = ۰&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;۰ H&lt;sub&gt;1&lt;/sub&gt; : ρ ≠&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;بین کاهش موفقیت فردی و عملکرد سازمانی رابطه وجود ندارد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;بین کاهش موفقیت فردی و عملکرد سازمانی رابطه وجود دارد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;آزمون فرضیه&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در جدول (۴-۹) نتایج محاسبه ضریب همبستگی بین کاهش موفقیت فردی و عملکرد سازمانی ارائه گردیده است:&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;جدول(۴-۹): مقادیر ضریب همبستگی&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;فرضیه&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
&lt;strong&gt;تعداد&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
&lt;strong&gt;نوع آزمون&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
&lt;strong&gt;ضریب همبستگی&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
&lt;strong&gt;Sig&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
&lt;strong&gt;نتیجه آزمون&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
&lt;strong&gt;رابطه کاهش موفقیت فردی و عملکرد سازمانی&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;۱۴۳&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;پیرسون&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;۰٫۶۸۹-&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;۰٫۰۰۰&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;تأیید فرضیه&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;همان طور که در جدول (۴-۹) دیده می­ شود با انجام آزمون پیرسون در سطح اطمینان ۹۵ درصد، مقدار ۰٫۰۰۰Sig = به دست آمد. چون مقدار ۰٫۰۵ Sig&amp;lt; می‌باشد، لذا فرض صفر رد و فرض مقابل را می‌پذیریم. یعنی رابطه‌ معناداری بین کاهش موفقیت فردی و عملکرد سازمانی وجود دارد. و از آنجا که میزان ضریب همبستگی پیرسون برای این آزمون ۰٫۶۸۹- می‌باشد، لذا نوع رابطه منفی می‌باشد. بدین ترتیب فرضیه فرعی سوم تحقیق در سطح اطمینان ۹۵% تأیید می‌گردد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;۴-۳-۲-۴- فرضیه اصلی&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;فرضیه اصلی تحقیق به صورت زیر بیان شده است:&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;فرضیه اصلی: بین فرسودگی شغلی با عملکرد سازمانی در کارکنان صف بانک سپه استان قم ارتباط معناداری وجود دارد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;شکل ریاضی فرض آماری به صورت زیر است:&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;H&lt;sub&gt;0&lt;/sub&gt;: ρ = ۰&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;۰ H&lt;sub&gt;1&lt;/sub&gt; : ρ ≠&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;بین فرسودگی شغلی و عملکرد سازمانی رابطه وجود ندارد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;بین فرسودگی شغلی و عملکرد سازمانی رابطه وجود دارد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;آزمون فرضیه&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در جدول (۴-۱۰) نتایج محاسبه ضریب همبستگی بین کاهش موفقیت فردی و عملکرد سازمانی ارائه گردیده است:&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;جدول(۴-۱۰): مقادیر ضریب همبستگی&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;فرضیه&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
&lt;strong&gt;تعداد&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
&lt;strong&gt;نوع آزمون&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
&lt;strong&gt;ضریب همبستگی&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
&lt;strong&gt;Sig&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
&lt;strong&gt;نتیجه آزمون&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
&lt;strong&gt;رابطه فرسودگی شغلی و عملکرد سازمانی&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;۱۴۳&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;پیرسون&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;۰٫۷۲۸-&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;۰٫۰۰۰&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;تأیید فرضیه&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;همان طور که در جدول (۴-۱۰) دیده می­ شود با انجام آزمون پیرسون در سطح اطمینان ۹۵ درصد، مقدار ۰٫۰۰۰Sig = به دست آمد. چون مقدار ۰٫۰۵ Sig&amp;lt; می‌باشد، لذا فرض صفر رد و فرض مقابل را می‌پذیریم. یعنی رابطه‌ معناداری بین فرسودگی شغلی و عملکرد سازمانی وجود دارد. و از آنجا که میزان ضریب همبستگی پیرسون برای این آزمون ۰٫۷۲۸- می‌باشد، لذا نوع رابطه منفی می‌باشد. بدین ترتیب فرضیه اصلی تحقیق در سطح اطمینان ۹۵% تأیید می‌گردد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;۴-۴- سایر یافته ­های تحقیق&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در این بخش به بررسی سایر نتایجی که از دیگر آزمون­های آماری کسب شده است پرداخته خواهد شد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;۴-۴-۱) آزمون تی(T) دو جامعه مستقل و من- ویتنی (آزمون U)&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;از این آزمون­ها به منظور مقایسه میانگین دو جامعه یا نمونه نسبت به هم استفاده می­ شود. در این تحقیق از این آزمون­ها برای بررسی تأثیر جنسیت بر متغیرها استفاده شده است. برای متغیرهای که توزیع آن­ها غیر نرمال است از آزمون من- ویتنی و متغیرهای که توزیع آن‌ ها نرمال است از آزمون تی(T) دو جامعه مستقل استفاده شده است.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ul&gt;
&lt;li&gt;آزمون T برای آزمودن این فرضیه که تحلیل و خستگی عاطفی بین دو گروه مردان و زنان تفاوتی ندارد.&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;
&lt;p&gt;شکل ریاضی این فرضیه به صورت زیر است:&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;H&lt;sub&gt;0&lt;/sub&gt;: µ&lt;sub&gt;۱&lt;/sub&gt; = µ&lt;sub&gt;۲&lt;/sub&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;µ&lt;sub&gt;۲&lt;/sub&gt; H&lt;sub&gt;1&lt;/sub&gt;: µ&lt;sub&gt;۱&lt;/sub&gt;≠&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;میانگین متغیر تحلیل و خستگی عاطفی دو گروه مردان و زنان تفاوتی ندارد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;میانگین متغیر تحلیل و خستگی عاطفی دو گروه مردان و زنان تفاوت دارد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;آماره‌های توصیفی هر دو گروه در جدول (۴-۱۱) آورده شده است:&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;جدول (۴-۱۱): آماره­ های توصیفی&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;نمونه&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
&lt;strong&gt;تعداد&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
&lt;strong&gt;میانگین&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
&lt;strong&gt;انحراف معیار&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
&lt;strong&gt;زنان&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;۵۰&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;۲٫۶۲۱&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;۰٫۴۹۱&lt;/p&gt;


&lt;p&gt;&lt;strong&gt;مردان&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;۹۳&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;۲٫۴۷۴&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;۰٫۵۴۴&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;برای اجرای آزمون فرض فوق ابتدا آزمون فرض برابری واریانس‌های دو گروه مردان و زنان مورد اجرا قرار می‌گیرد، شکل ریاضی این آزمون به صورت زیر است.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;H&lt;sub&gt;0&lt;/sub&gt;: δ&lt;sub&gt;۱&lt;/sub&gt;&lt;sup&gt;۲&lt;/sup&gt; = δ&lt;sub&gt;۲&lt;/sub&gt;&lt;sup&gt;۲&lt;/sup&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;δ&lt;sub&gt;۲&lt;/sub&gt;&lt;sup&gt;۲&lt;/sup&gt; H&lt;sub&gt;1&lt;/sub&gt;: δ&lt;sub&gt;۱&lt;/sub&gt;&lt;sup&gt;۲&lt;/sup&gt;≠&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;واریانس متغیر تحلیل و خستگی عاطفی دو گروه مردان و زنان تفاوتی ندارد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;واریانس متغیر تحلیل و خستگی عاطفی دو گروه مردان و زنان تفاوت دارد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;خروجی نتایج آزمون لِوِن&lt;sup&gt;[۷]&lt;/sup&gt; برای بررسی برابری واریانس‌ها در جدول (۴-۱۲) نشان داده شده است:&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;جدول (۴-۱۲): بررسی فرض برابری واریانس­ها توسط آزمون لون&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;فرض برابری واریانس‌ها&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
&lt;strong&gt;آزمون برابری واریانس‌ها&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;


&lt;p&gt;مقدار آماره فیشر&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;سطح معنی‌داری&lt;/p&gt;


&lt;p&gt;۰٫۲۵۲&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;۰٫۶۱۷&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;همان طور که ملاحظه می‌شود، مقدار سطح معنی‌داری به دست آمده از مقدار ۰٫۰۵ بیشتر بوده و لذا شواهد کافی برای رد فرض صفر وجود ندارد، ‌بنابرین‏ در سطح اطمینان ۹۵%، فرض صفر تأیید شده و آزمون تی مستقل را در شرایط فرض برابری واریانس‌ها انجام خواهیم داد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;جدول (۴-۱۳): بررسی آزمون تی مستقل&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;آماره T&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
&lt;strong&gt;درجه&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;آزادی&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;سطح معنی‌داری&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;
&lt;strong&gt;تفاوت&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;میانگین‌ها&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;


&lt;p&gt;۰٫۱۱۰-&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;۱۴۱&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;۰٫۹۱۲&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;۰٫۰۱۳-&lt;/p&gt;



&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– exhaustion Emotional ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Depersonalization ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Personal accomplishment ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;-Brand, Tamari ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;. pilot ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;-Kolmogrov-Smirinov ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div class=&quot;item_footer&quot;&gt;&lt;p&gt;&lt;small&gt;&lt;a href=&quot;https://yi.kowsarblog.ir/فایل-های-مقالات-و-پروژه-ها-۴-۴-۱-آزمون-تی-t-دو-جامعه-مستقل&quot;&gt;مطلب اصلی&lt;/a&gt; در &lt;a href=&quot;http://kowsarblog.ir/&quot;&gt;کوثربلاگ &lt;/a&gt;ارسال شده است.&lt;/small&gt;&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;</description>
	<content:encoded><![CDATA[<div class='story' data-id='1557099637' data-words='952' id='story'>
<div>
<p> </p>
<p><strong>۴-۳-۲-۲- فرضیه فرعی دوم</strong></p>
<p> </p>
<p>فرضیه فرعی دوم تحقیق به صورت زیر بیان شده است:</p>
<p> </p>
<p>فرضیه فرعی دوم: بین مسخ شخصیت با عملکرد سازمانی در کارکنان صف بانک سپه استان قم ارتباط معناداری وجود دارد.</p>
<p> </p>
<p>شکل ریاضی فرض آماری به صورت زیر است:</p>
<p> </p>
<p>H<sub>0</sub>: ρ = ۰</p>
<p> </p>
<p>۰ H<sub>1</sub> : ρ ≠</p>
<p> </p>
<p>بین مسخ شخصیت و عملکرد سازمانی رابطه وجود ندارد.</p>
<p> </p>
<p>بین مسخ شخصیت و عملکرد سازمانی رابطه وجود دارد.</p>
<p> </p>
<p><strong>آزمون فرضیه</strong></p>
<p> </p>
<p>در جدول (۴-۸) نتایج محاسبه ضریب همبستگی بین مسخ شخصیت و عملکرد سازمانی ارائه گردیده است:</p>
<p> </p>
<p>جدول(۴-۸): مقادیر ضریب همبستگی</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p><strong>فرضیه</strong><br />
<strong>تعداد</strong><br />
<strong>نوع آزمون</strong><br />
<strong>ضریب همبستگی</strong><br />
<strong>Sig</strong><br />
<strong>نتیجه آزمون</strong><br />
<strong>رابطه مسخ شخصیت و عملکرد سازمانی</strong></p>

<p>۱۴۳</p>

<p>اسپیرمن</p>

<p>۰٫۴۳۶-</p>

<p>۰٫۰۰۰</p>

<p>تأیید فرضیه</p>



<p>همان طور که در جدول (۴-۸) دیده می­ شود با انجام آزمون اسپیرمن در سطح اطمینان ۹۵ درصد، مقدار ۰٫۰۰۰Sig = به دست آمد. چون مقدار ۰٫۰۵ Sig&lt; می‌باشد، لذا فرض صفر رد و فرض مقابل را می‌پذیریم. یعنی رابطه‌ معناداری بین مسخ شخصیت و عملکرد سازمانی وجود دارد. و از آنجا که میزان ضریب همبستگی اسپیرمن برای این آزمون ۰٫۴۳۶- می‌باشد، لذا نوع رابطه منفی می‌باشد. بدین ترتیب فرضیه فرعی دوم تحقیق در سطح اطمینان ۹۵% تأیید می‌گردد.</p>
<p><img src='https://ziso.ir/wp-content/uploads/2022/11/pics_9_50.png' /></p>
<p><a href='https://shivadanesh.ir/'> <img src='https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/10/THESIS-PAPER-3.png' /></a></p>
<p> </p>
<p><strong>۴-۳-۲-۳- فرضیه فرعی سوم</strong></p>
<p> </p>
<p>فرضیه فرعی سوم تحقیق به صورت زیر بیان شده است:</p>
<p> </p>
<p>فرضیه فرعی سوم: بین کاهش موفقیت فردی با عملکرد سازمانی در کارکنان صف بانک سپه استان قم ارتباط معناداری وجود دارد.</p>
<p> </p>
<p>شکل ریاضی فرض آماری به صورت زیر است:</p>
<p> </p>
<p>H<sub>0</sub>: ρ = ۰</p>
<p> </p>
<p>۰ H<sub>1</sub> : ρ ≠</p>
<p> </p>
<p>بین کاهش موفقیت فردی و عملکرد سازمانی رابطه وجود ندارد.</p>
<p> </p>
<p>بین کاهش موفقیت فردی و عملکرد سازمانی رابطه وجود دارد.</p>
<p> </p>
<p><strong>آزمون فرضیه</strong></p>
<p> </p>
<p>در جدول (۴-۹) نتایج محاسبه ضریب همبستگی بین کاهش موفقیت فردی و عملکرد سازمانی ارائه گردیده است:</p>
<p> </p>
<p>جدول(۴-۹): مقادیر ضریب همبستگی</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p><strong>فرضیه</strong><br />
<strong>تعداد</strong><br />
<strong>نوع آزمون</strong><br />
<strong>ضریب همبستگی</strong><br />
<strong>Sig</strong><br />
<strong>نتیجه آزمون</strong><br />
<strong>رابطه کاهش موفقیت فردی و عملکرد سازمانی</strong></p>

<p>۱۴۳</p>

<p>پیرسون</p>

<p>۰٫۶۸۹-</p>

<p>۰٫۰۰۰</p>

<p>تأیید فرضیه</p>



<p>همان طور که در جدول (۴-۹) دیده می­ شود با انجام آزمون پیرسون در سطح اطمینان ۹۵ درصد، مقدار ۰٫۰۰۰Sig = به دست آمد. چون مقدار ۰٫۰۵ Sig&lt; می‌باشد، لذا فرض صفر رد و فرض مقابل را می‌پذیریم. یعنی رابطه‌ معناداری بین کاهش موفقیت فردی و عملکرد سازمانی وجود دارد. و از آنجا که میزان ضریب همبستگی پیرسون برای این آزمون ۰٫۶۸۹- می‌باشد، لذا نوع رابطه منفی می‌باشد. بدین ترتیب فرضیه فرعی سوم تحقیق در سطح اطمینان ۹۵% تأیید می‌گردد.</p>
<p> </p>
<p><strong>۴-۳-۲-۴- فرضیه اصلی</strong></p>
<p> </p>
<p>فرضیه اصلی تحقیق به صورت زیر بیان شده است:</p>
<p> </p>
<p>فرضیه اصلی: بین فرسودگی شغلی با عملکرد سازمانی در کارکنان صف بانک سپه استان قم ارتباط معناداری وجود دارد.</p>
<p> </p>
<p>شکل ریاضی فرض آماری به صورت زیر است:</p>
<p> </p>
<p>H<sub>0</sub>: ρ = ۰</p>
<p> </p>
<p>۰ H<sub>1</sub> : ρ ≠</p>
<p> </p>
<p>بین فرسودگی شغلی و عملکرد سازمانی رابطه وجود ندارد.</p>
<p> </p>
<p>بین فرسودگی شغلی و عملکرد سازمانی رابطه وجود دارد.</p>
<p> </p>
<p><strong>آزمون فرضیه</strong></p>
<p> </p>
<p>در جدول (۴-۱۰) نتایج محاسبه ضریب همبستگی بین کاهش موفقیت فردی و عملکرد سازمانی ارائه گردیده است:</p>
<p> </p>
<p>جدول(۴-۱۰): مقادیر ضریب همبستگی</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p><strong>فرضیه</strong><br />
<strong>تعداد</strong><br />
<strong>نوع آزمون</strong><br />
<strong>ضریب همبستگی</strong><br />
<strong>Sig</strong><br />
<strong>نتیجه آزمون</strong><br />
<strong>رابطه فرسودگی شغلی و عملکرد سازمانی</strong></p>

<p>۱۴۳</p>

<p>پیرسون</p>

<p>۰٫۷۲۸-</p>

<p>۰٫۰۰۰</p>

<p>تأیید فرضیه</p>



<p>همان طور که در جدول (۴-۱۰) دیده می­ شود با انجام آزمون پیرسون در سطح اطمینان ۹۵ درصد، مقدار ۰٫۰۰۰Sig = به دست آمد. چون مقدار ۰٫۰۵ Sig&lt; می‌باشد، لذا فرض صفر رد و فرض مقابل را می‌پذیریم. یعنی رابطه‌ معناداری بین فرسودگی شغلی و عملکرد سازمانی وجود دارد. و از آنجا که میزان ضریب همبستگی پیرسون برای این آزمون ۰٫۷۲۸- می‌باشد، لذا نوع رابطه منفی می‌باشد. بدین ترتیب فرضیه اصلی تحقیق در سطح اطمینان ۹۵% تأیید می‌گردد.</p>
<p> </p>
<p><strong>۴-۴- سایر یافته ­های تحقیق</strong></p>
<p> </p>
<p>در این بخش به بررسی سایر نتایجی که از دیگر آزمون­های آماری کسب شده است پرداخته خواهد شد.</p>
<p> </p>
<p><strong>۴-۴-۱) آزمون تی(T) دو جامعه مستقل و من- ویتنی (آزمون U)</strong></p>
<p> </p>
<p>از این آزمون­ها به منظور مقایسه میانگین دو جامعه یا نمونه نسبت به هم استفاده می­ شود. در این تحقیق از این آزمون­ها برای بررسی تأثیر جنسیت بر متغیرها استفاده شده است. برای متغیرهای که توزیع آن­ها غیر نرمال است از آزمون من- ویتنی و متغیرهای که توزیع آن‌ ها نرمال است از آزمون تی(T) دو جامعه مستقل استفاده شده است.</p>
<p> </p>
<ul>
<li>آزمون T برای آزمودن این فرضیه که تحلیل و خستگی عاطفی بین دو گروه مردان و زنان تفاوتی ندارد.</li>
</ul>
<p>شکل ریاضی این فرضیه به صورت زیر است:</p>
<p> </p>
<p>H<sub>0</sub>: µ<sub>۱</sub> = µ<sub>۲</sub></p>
<p> </p>
<p>µ<sub>۲</sub> H<sub>1</sub>: µ<sub>۱</sub>≠</p>
<p> </p>
<p>میانگین متغیر تحلیل و خستگی عاطفی دو گروه مردان و زنان تفاوتی ندارد.</p>
<p> </p>
<p>میانگین متغیر تحلیل و خستگی عاطفی دو گروه مردان و زنان تفاوت دارد.</p>
<p> </p>
<p>آماره‌های توصیفی هر دو گروه در جدول (۴-۱۱) آورده شده است:</p>
<p> </p>
<p>جدول (۴-۱۱): آماره­ های توصیفی</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p><strong>نمونه</strong><br />
<strong>تعداد</strong><br />
<strong>میانگین</strong><br />
<strong>انحراف معیار</strong><br />
<strong>زنان</strong></p>

<p>۵۰</p>

<p>۲٫۶۲۱</p>

<p>۰٫۴۹۱</p>


<p><strong>مردان</strong></p>

<p>۹۳</p>

<p>۲٫۴۷۴</p>

<p>۰٫۵۴۴</p>



<p>برای اجرای آزمون فرض فوق ابتدا آزمون فرض برابری واریانس‌های دو گروه مردان و زنان مورد اجرا قرار می‌گیرد، شکل ریاضی این آزمون به صورت زیر است.</p>
<p> </p>
<p>H<sub>0</sub>: δ<sub>۱</sub><sup>۲</sup> = δ<sub>۲</sub><sup>۲</sup></p>
<p> </p>
<p>δ<sub>۲</sub><sup>۲</sup> H<sub>1</sub>: δ<sub>۱</sub><sup>۲</sup>≠</p>
<p> </p>
<p>واریانس متغیر تحلیل و خستگی عاطفی دو گروه مردان و زنان تفاوتی ندارد.</p>
<p> </p>
<p>واریانس متغیر تحلیل و خستگی عاطفی دو گروه مردان و زنان تفاوت دارد.</p>
<p> </p>
<p>خروجی نتایج آزمون لِوِن<sup>[۷]</sup> برای بررسی برابری واریانس‌ها در جدول (۴-۱۲) نشان داده شده است:</p>
<p> </p>
<p>جدول (۴-۱۲): بررسی فرض برابری واریانس­ها توسط آزمون لون</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p><strong>فرض برابری واریانس‌ها</strong><br />
<strong>آزمون برابری واریانس‌ها</strong></p>


<p>مقدار آماره فیشر</p>

<p>سطح معنی‌داری</p>


<p>۰٫۲۵۲</p>

<p>۰٫۶۱۷</p>



<p>همان طور که ملاحظه می‌شود، مقدار سطح معنی‌داری به دست آمده از مقدار ۰٫۰۵ بیشتر بوده و لذا شواهد کافی برای رد فرض صفر وجود ندارد، ‌بنابرین‏ در سطح اطمینان ۹۵%، فرض صفر تأیید شده و آزمون تی مستقل را در شرایط فرض برابری واریانس‌ها انجام خواهیم داد.</p>
<p> </p>
<p>جدول (۴-۱۳): بررسی آزمون تی مستقل</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p><strong>آماره T</strong><br />
<strong>درجه</strong></p>
<p> </p>
<p><strong>آزادی</strong></p>
<p><strong>سطح معنی‌داری</strong><br />
<strong>تفاوت</strong></p>
<p> </p>
<p><strong>میانگین‌ها</strong></p>


<p>۰٫۱۱۰-</p>

<p>۱۴۱</p>

<p>۰٫۹۱۲</p>

<p>۰٫۰۱۳-</p>



<p> </p>
<ol>
<li>
<ol>
<li>– exhaustion Emotional ↑</li>
</ol>
</li>
</ol>
<p> </p>
<ol>
<li>
<ol>
<li>– Depersonalization ↑</li>
</ol>
</li>
</ol>
<p> </p>
<ol>
<li>
<ol>
<li>– Personal accomplishment ↑</li>
</ol>
</li>
</ol>
<p> </p>
<ol>
<li>
<ol>
<li>-Brand, Tamari ↑</li>
</ol>
</li>
</ol>
<p> </p>
<ol>
<li>
<ol>
<li>. pilot ↑</li>
</ol>
</li>
</ol>
<p> </p>
<ol>
<li>
<ol>
<li>-Kolmogrov-Smirinov ↑</li>
</ol>
</li>
</ol>
</div>
</div><div class="item_footer"><p><small><a href="https://yi.kowsarblog.ir/فایل-های-مقالات-و-پروژه-ها-۴-۴-۱-آزمون-تی-t-دو-جامعه-مستقل">مطلب اصلی</a> در <a href="http://kowsarblog.ir/">کوثربلاگ </a>ارسال شده است.</small></p></div>]]></content:encoded>
			</item>

<item rdf:about="https://yi.kowsarblog.ir/تحقیق-پروژه-و-پایان-نامه-مبحث-پنجم-تخلف-در-ترکیب-دیوان-داوری-و-عدم-رعایت">
	<title>تحقیق-پروژه و پایان نامه | مبحث پنجم- تخلف در ترکیب دیوان داوری و عدم رعایت تشریفات داوری – 8</title>
	<link>https://yi.kowsarblog.ir/تحقیق-پروژه-و-پایان-نامه-مبحث-پنجم-تخلف-در-ترکیب-دیوان-داوری-و-عدم-رعایت</link>
	<dc:date>1401-09-23T08:14:00Z</dc:date>	<dc:creator>نویسنده محمدی</dc:creator>
	<dc:subject>بدون موضوع</dc:subject>
		<description>&lt;div class=&#039;story&#039; data-id=&#039;1557093390&#039; data-words=&#039;1173&#039; id=&#039;story&#039;&gt;
&lt;div&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;h3&gt;مبحث پنجم- تخلف در ترکیب دیوان داوری و عدم رعایت تشریفات داوری&lt;/h3&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;داوران پس از اینکه از وجود توافقنامه یا قرارداد داوری که منشاء صلاحیت آن ها‌ است، آگاه شدند؛ بایستی به موارد مقرر در آیین رسیدگی و نحوه ی ترکیب داوری نیز توجه لازم را به عمل بیاورند. بدین صورت که در نهایت، کیفیت تشکیل، آیین و تشریفات داوری نیز بر مبنای اراده ی طرفین بنا شده باشد .قواعد و تشریفات شکلی داوری از شروع رسیدگی تا ترکیب دیوان داوری و نحوه ی رسیدگی، نصب و جرح داوران، دفاعیات و تا صدور رأی‌ داوری را در بر می‌گیرد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;img src=&#039;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2022/11/pics_10_50.png&#039; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در ابتدای این بحث خوب است این موضوع یاد آور شود که، در بیشتر تفاسیر حقوقی در این باب به مسئله ی ترکیب و تشکیل دیوان داوری اشاره شده، اما از آنجایی که که عدم ترکیب صحیح در تشکیل دیوان داوری ناشی از قصور در رعایت تشریفات مقرر در این مورد است، (Gaillard &amp;amp; Savage, 1999, 935) ‌بنابرین‏ موضوعات ترکیب و تشکیل، تحت عنوان کلی« تشریفات داوری» بررسی می شود. کنوانسیون نیویورک ۱۹۵۸ در قسمت د از بند اول ماده ی پنج، یکی از موارد امتناع از اجرای رأی‌ را این طور بیان می‌کند:&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href=&#039;https://nefo.ir/&#039;&gt;&lt;img src=&#039;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/10/THESIS-PAPER-5.png&#039; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;«نحوه ی تشکیل دادگاه داوری یا تشریفات داوری منطبق با توافق طرفین نبوده یا در فقدان چنین توافقی، با قوانین کشوری که داوری در آنجا انجام شده، مطابق نباشد.» ‌در مورد این بند، به مانند برخی دیگر از کنوانسیون های اروپایی، توافق طرفین را هم ارز قانون محل داوری ندانسته بلکه ارزش و میدان بیشتری برای این نوع از توافقات قائل شده است. پس از این، وجود دو معیار را مانع از اجرا و شناسایی رأی‌ دانسته است:&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;اول: قانون یا قواعد مورد توافقات طرفین که قاعده ی اولیه حل تعارض است و دوم : قانون محل داوری که معیار در درجه ی دوم (معیار ثانوی) در نظر گرفته شده است. می توان این طور بیان نمود که، چنانچه در برگزاری و اجرای داوری و نحوه ی تشکیل دیوان داوری از جهت خصوصیات داوران یا آیین و روش داوری توافقی صورت نگیرد یا بر اساس قانون کشوری که داوری در آنجا برگزار شده است نباشد در این صورت دادگاه محل اجرا (دادگاه ملی) از شناسایی و اجرای رأی‌ داوری امتناع خواهد کرد. در این صورت بر اساس ماده ی اول قسمت یک و ماده ی پنج ه بند اول کنوانسیون نیویورک یه قانون مقر داوری اجازه می‌دهد که محدودیت‌هایی را بر روند داوری و اجرای آرا داوری تحمیل کند. (Donovan &amp;amp; Greenawalt, 2006, 12) در این گونه موارد که قانون به هر ترتیبی نقض گردد طبیعتاً دادگاه قانون مقر خود را اعمال خواهد کرد؛ هر چند در این موارد کنوانسیون تصریحی ‌به این موضوع نداشته است که در صورت نقض کدام قانون باید اعمال شود. برای بررسی اینکه با توجه به نص این بند از کنوانسیون که ترکیب دیوان داوری یا آیین داوری کدام ناقص یا نامنظم بوده است، دادگاه ابتدا وجود توافق طرفین را بررسی خواهد کرد. اگر توافقی نباشد سپس قانون محل داوری در نظر گرفته می شود. در پاره ای موارد که توافقی وجود دارد اما نیاز به قانونی برای کامل تر شدن داشته باشد باز هم قانون محل داوری آن را تکمیل خواهد کرد. اما مطلبی در خصوص امکان انتخاب قواعد داوری به جای قانون در این قسمت معمولاً مطرح است که از آن تفاسیر و برداشت های متفاوتی صورت می‌گیرد. بدین صورت که آنچه طرفین به آن توافق کرده باشند بر خلاف قانون محل داوری باشد به عبارتی توافق طرفین بر خلاف قواعد آمره باشد؛ یا بر عکس آن اگر بر اساس قواعد مقر داوری و قواعد آمره این تشریفات برقرار شود بر خلاف توافق طرفین و خواست و اراده ی طرفین داوری خواهد بود. در این صورت کدام از این دو حالت می‌تواند صحیح باشد؟&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;به نظر می‌رسد در خصوص این موضوع تفاسیر متفاوتی شده است، یکی از این تفاسیر این است که اگر رایی بر خلاف قواعد آمره کشوری صادر شود بر اساس همین ماده متضرر از رأی‌ می‌تواند ابطال رأی‌ را دادگاه از آن کشور بخواهد. و باز اگر بر اساس قواعد آمره آن کشور صادرشود اما بر خلاف توافقات طرفینی باشد متضرر ابطال رأی‌ با تمسک به همین بند از دادگاه بخواهد. هر چند در رویه قطعا دادگاه های هر کشوری بر خلاف قواعد آمره ی خود و به نفع توافق طرفین رأی‌ نخواهند داد. یعنی در عمل آنچه قاعده است بر آنچه به اصل اراده بر می‌گردد ترجیح می‌یابد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;برداشت و برخورد با این موضوع را این گونه نیز می توان تفسیر کرد که، در روش اول که تبعیت صرف از توافق طرفین باشد حتی اگر مطابق با قاعده ی آمره ی کشور محل اجرا هم نباشد از این طرز فکر نشأت می‌گیرد که روند داوری اساسا محتاج محل نیست و به نظریه ی داوری بدون محل بر می‌گردد. بر این اساس قانون هیچ کشوری برتر بر توافقات طرفینی نخواهد بود.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در روش دوم که قانون محل داوری و قواعد آمره را برتر بر توافق طرفین قرار می‌دهیم، این قانون و مقررات است که همه جا برتری می‌یابد که در این روش اخیر لااقل می‌تواند تنها تفسیرش محدود به قوانین یک کشور خاص شود. قانون داوری تجاری ایران در ماده ی ۱۹ خود به اصل حاکمیت اراده ی طرفین اشاره دارد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;و در قسمت اول بند واو ماده ی ۳۳ تشکیل هیات داوری بر خلاف قواعد را تصریح ‌کرده‌است. همچنین در بند یک ماده ی ۱۱ همین قانون به موضوع ترکیب و تشکیل دیوان داوری از منظر نظم عمومی اشاره شده است. طبق این ماده طرف ایرانی نمی تواند تا زمانی که اختلافی ایجاد نشده است به نحوی ملتزم شود که در صورت بروز اختلاف حل آن را به داورانی ارجاع دهد که تابعیت همانندطرف دیگر داوری را دارند. در قسمتی دیگر از این قانون قسمت ز از بند اول ماده ی ۳۳ یکی دیگراز موجبات ابطال را رأی‌ داوری که مؤثر بوده و جرح شده است دانسته است؛ که این جرح داور را بسیاری از حقوق ‌دانان از باب عدم تشکیل صحیح دیوان داوری نمی دانند و بیشتر این گونه موارد را زیر مجموعه ی نظم عمومی یا تحت دادرسی غیر منصفانه عنوان می‌کنند. در عین حال فقدان اوصاف خاصی برای داور که در قرارداد یا قانون یا قواعد حاکم بر داوری پیش‌بینی شده است می‌تواند به نقض آیین مقرر و عدم تشکیل صحیح داوری تعبیر گردد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;لذا اگر یک طرف مثلا تمام داورها را تعیین کند و یا به خوانده فرصت برای ارائه ی پرونده داده نشود و این امور در دادرسی داوری صورت گیرد طبیعی است که بر خلاف آیین تشریفات داوری عمل شده و از شناسایی و اجرای آن رأی‌ جلوگیری خواهد شد. بر طبق این قانون اگر توافقی بین طرفین حاصل نشود، آنگاه بر طبق قانون محل داوری هیاتی تشکیل و قانون و آیین شکلی آن تعیین خواهد شد. در این مورد هم فرقی نمی کند و آیین تشریفات مقرر باید حتما رعایت شود.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;معمولاً قانون‌های داوری محل تشکیل داوری آزادی عمل برای داورها در انتخاب قواعد شکلی قائل هستند. چراکه این وضوع در بند دوم ماده ی ۲۷ قانون داوری تجاری ایران درج شده است.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;h2&gt;بخش دوم- موانع غیر مشترک شناسایی و اجرای رأی‌ در کنوانسیون نیویورک ۱۹۵۸ و قانون داوری تجاری ایران ۱۳۷۶&lt;/h2&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div class=&quot;item_footer&quot;&gt;&lt;p&gt;&lt;small&gt;&lt;a href=&quot;https://yi.kowsarblog.ir/تحقیق-پروژه-و-پایان-نامه-مبحث-پنجم-تخلف-در-ترکیب-دیوان-داوری-و-عدم-رعایت&quot;&gt;مطلب اصلی&lt;/a&gt; در &lt;a href=&quot;http://kowsarblog.ir/&quot;&gt;کوثربلاگ &lt;/a&gt;ارسال شده است.&lt;/small&gt;&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;</description>
	<content:encoded><![CDATA[<div class='story' data-id='1557093390' data-words='1173' id='story'>
<div>
<p> </p>
<h3>مبحث پنجم- تخلف در ترکیب دیوان داوری و عدم رعایت تشریفات داوری</h3>
<p> </p>
<p>داوران پس از اینکه از وجود توافقنامه یا قرارداد داوری که منشاء صلاحیت آن ها‌ است، آگاه شدند؛ بایستی به موارد مقرر در آیین رسیدگی و نحوه ی ترکیب داوری نیز توجه لازم را به عمل بیاورند. بدین صورت که در نهایت، کیفیت تشکیل، آیین و تشریفات داوری نیز بر مبنای اراده ی طرفین بنا شده باشد .قواعد و تشریفات شکلی داوری از شروع رسیدگی تا ترکیب دیوان داوری و نحوه ی رسیدگی، نصب و جرح داوران، دفاعیات و تا صدور رأی‌ داوری را در بر می‌گیرد.</p>
<p><img src='https://ziso.ir/wp-content/uploads/2022/11/pics_10_50.png' /></p>
<p> </p>
<p>در ابتدای این بحث خوب است این موضوع یاد آور شود که، در بیشتر تفاسیر حقوقی در این باب به مسئله ی ترکیب و تشکیل دیوان داوری اشاره شده، اما از آنجایی که که عدم ترکیب صحیح در تشکیل دیوان داوری ناشی از قصور در رعایت تشریفات مقرر در این مورد است، (Gaillard &amp; Savage, 1999, 935) ‌بنابرین‏ موضوعات ترکیب و تشکیل، تحت عنوان کلی« تشریفات داوری» بررسی می شود. کنوانسیون نیویورک ۱۹۵۸ در قسمت د از بند اول ماده ی پنج، یکی از موارد امتناع از اجرای رأی‌ را این طور بیان می‌کند:</p>
<p><a href='https://nefo.ir/'><img src='https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/10/THESIS-PAPER-5.png' /></a></p>
<p> </p>
<p>«نحوه ی تشکیل دادگاه داوری یا تشریفات داوری منطبق با توافق طرفین نبوده یا در فقدان چنین توافقی، با قوانین کشوری که داوری در آنجا انجام شده، مطابق نباشد.» ‌در مورد این بند، به مانند برخی دیگر از کنوانسیون های اروپایی، توافق طرفین را هم ارز قانون محل داوری ندانسته بلکه ارزش و میدان بیشتری برای این نوع از توافقات قائل شده است. پس از این، وجود دو معیار را مانع از اجرا و شناسایی رأی‌ دانسته است:</p>
<p> </p>
<p>اول: قانون یا قواعد مورد توافقات طرفین که قاعده ی اولیه حل تعارض است و دوم : قانون محل داوری که معیار در درجه ی دوم (معیار ثانوی) در نظر گرفته شده است. می توان این طور بیان نمود که، چنانچه در برگزاری و اجرای داوری و نحوه ی تشکیل دیوان داوری از جهت خصوصیات داوران یا آیین و روش داوری توافقی صورت نگیرد یا بر اساس قانون کشوری که داوری در آنجا برگزار شده است نباشد در این صورت دادگاه محل اجرا (دادگاه ملی) از شناسایی و اجرای رأی‌ داوری امتناع خواهد کرد. در این صورت بر اساس ماده ی اول قسمت یک و ماده ی پنج ه بند اول کنوانسیون نیویورک یه قانون مقر داوری اجازه می‌دهد که محدودیت‌هایی را بر روند داوری و اجرای آرا داوری تحمیل کند. (Donovan &amp; Greenawalt, 2006, 12) در این گونه موارد که قانون به هر ترتیبی نقض گردد طبیعتاً دادگاه قانون مقر خود را اعمال خواهد کرد؛ هر چند در این موارد کنوانسیون تصریحی ‌به این موضوع نداشته است که در صورت نقض کدام قانون باید اعمال شود. برای بررسی اینکه با توجه به نص این بند از کنوانسیون که ترکیب دیوان داوری یا آیین داوری کدام ناقص یا نامنظم بوده است، دادگاه ابتدا وجود توافق طرفین را بررسی خواهد کرد. اگر توافقی نباشد سپس قانون محل داوری در نظر گرفته می شود. در پاره ای موارد که توافقی وجود دارد اما نیاز به قانونی برای کامل تر شدن داشته باشد باز هم قانون محل داوری آن را تکمیل خواهد کرد. اما مطلبی در خصوص امکان انتخاب قواعد داوری به جای قانون در این قسمت معمولاً مطرح است که از آن تفاسیر و برداشت های متفاوتی صورت می‌گیرد. بدین صورت که آنچه طرفین به آن توافق کرده باشند بر خلاف قانون محل داوری باشد به عبارتی توافق طرفین بر خلاف قواعد آمره باشد؛ یا بر عکس آن اگر بر اساس قواعد مقر داوری و قواعد آمره این تشریفات برقرار شود بر خلاف توافق طرفین و خواست و اراده ی طرفین داوری خواهد بود. در این صورت کدام از این دو حالت می‌تواند صحیح باشد؟</p>
<p> </p>
<p>به نظر می‌رسد در خصوص این موضوع تفاسیر متفاوتی شده است، یکی از این تفاسیر این است که اگر رایی بر خلاف قواعد آمره کشوری صادر شود بر اساس همین ماده متضرر از رأی‌ می‌تواند ابطال رأی‌ را دادگاه از آن کشور بخواهد. و باز اگر بر اساس قواعد آمره آن کشور صادرشود اما بر خلاف توافقات طرفینی باشد متضرر ابطال رأی‌ با تمسک به همین بند از دادگاه بخواهد. هر چند در رویه قطعا دادگاه های هر کشوری بر خلاف قواعد آمره ی خود و به نفع توافق طرفین رأی‌ نخواهند داد. یعنی در عمل آنچه قاعده است بر آنچه به اصل اراده بر می‌گردد ترجیح می‌یابد.</p>
<p> </p>
<p>برداشت و برخورد با این موضوع را این گونه نیز می توان تفسیر کرد که، در روش اول که تبعیت صرف از توافق طرفین باشد حتی اگر مطابق با قاعده ی آمره ی کشور محل اجرا هم نباشد از این طرز فکر نشأت می‌گیرد که روند داوری اساسا محتاج محل نیست و به نظریه ی داوری بدون محل بر می‌گردد. بر این اساس قانون هیچ کشوری برتر بر توافقات طرفینی نخواهد بود.</p>
<p> </p>
<p>در روش دوم که قانون محل داوری و قواعد آمره را برتر بر توافق طرفین قرار می‌دهیم، این قانون و مقررات است که همه جا برتری می‌یابد که در این روش اخیر لااقل می‌تواند تنها تفسیرش محدود به قوانین یک کشور خاص شود. قانون داوری تجاری ایران در ماده ی ۱۹ خود به اصل حاکمیت اراده ی طرفین اشاره دارد.</p>
<p> </p>
<p>و در قسمت اول بند واو ماده ی ۳۳ تشکیل هیات داوری بر خلاف قواعد را تصریح ‌کرده‌است. همچنین در بند یک ماده ی ۱۱ همین قانون به موضوع ترکیب و تشکیل دیوان داوری از منظر نظم عمومی اشاره شده است. طبق این ماده طرف ایرانی نمی تواند تا زمانی که اختلافی ایجاد نشده است به نحوی ملتزم شود که در صورت بروز اختلاف حل آن را به داورانی ارجاع دهد که تابعیت همانندطرف دیگر داوری را دارند. در قسمتی دیگر از این قانون قسمت ز از بند اول ماده ی ۳۳ یکی دیگراز موجبات ابطال را رأی‌ داوری که مؤثر بوده و جرح شده است دانسته است؛ که این جرح داور را بسیاری از حقوق ‌دانان از باب عدم تشکیل صحیح دیوان داوری نمی دانند و بیشتر این گونه موارد را زیر مجموعه ی نظم عمومی یا تحت دادرسی غیر منصفانه عنوان می‌کنند. در عین حال فقدان اوصاف خاصی برای داور که در قرارداد یا قانون یا قواعد حاکم بر داوری پیش‌بینی شده است می‌تواند به نقض آیین مقرر و عدم تشکیل صحیح داوری تعبیر گردد.</p>
<p> </p>
<p>لذا اگر یک طرف مثلا تمام داورها را تعیین کند و یا به خوانده فرصت برای ارائه ی پرونده داده نشود و این امور در دادرسی داوری صورت گیرد طبیعی است که بر خلاف آیین تشریفات داوری عمل شده و از شناسایی و اجرای آن رأی‌ جلوگیری خواهد شد. بر طبق این قانون اگر توافقی بین طرفین حاصل نشود، آنگاه بر طبق قانون محل داوری هیاتی تشکیل و قانون و آیین شکلی آن تعیین خواهد شد. در این مورد هم فرقی نمی کند و آیین تشریفات مقرر باید حتما رعایت شود.</p>
<p> </p>
<p>معمولاً قانون‌های داوری محل تشکیل داوری آزادی عمل برای داورها در انتخاب قواعد شکلی قائل هستند. چراکه این وضوع در بند دوم ماده ی ۲۷ قانون داوری تجاری ایران درج شده است.</p>
<p> </p>
<h2>بخش دوم- موانع غیر مشترک شناسایی و اجرای رأی‌ در کنوانسیون نیویورک ۱۹۵۸ و قانون داوری تجاری ایران ۱۳۷۶</h2>
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	<title>دانلود پایان نامه های آماده | سبک مقتدرانه – 3</title>
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	<dc:date>1401-09-23T08:13:00Z</dc:date>	<dc:creator>نویسنده محمدی</dc:creator>
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		<description>&lt;div class=&#039;story&#039; data-id=&#039;1557163357&#039; data-words=&#039;802&#039; id=&#039;story&#039;&gt;
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&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;img src=&#039;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2022/06/problem-solving-49.jpg&#039; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;دوم:پژوهش های مربوط به ارتباط والدین با کودک که نگرش ها واعمال والدین را در فرایند فرزند پروری مورد بررسی قرار داده‌اند.روش های متفاوتی برای فرزندپروری مطرح شده اند؛ازیک دیدگاه فرزندپروری به سه روش تقسیم شده است که بر تقاضاها وپاسخدهی والدین مبتنی است وعبارتنداز:&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;img src=&#039;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2022/11/pics_24_50.png&#039; /&gt;&lt;/p&gt;
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&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;۱-شیوه مقتدرانه،۲-شیوه سهل گیرانه،۳-شیوه مستبدانه(مک کی&lt;sup&gt;[۲۲]&lt;/sup&gt;، ۲۰۰۶).سبک های فرزندپروری واجد دو مؤلفه‌ اساسی هستند:&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;۱- پاسخدهی(صمیمیت واطمینان بخشی)که به میزان تلاش والدین برای رشد ابراز وجود واستقلال ‌در کودکان ،حمایت واطمینان بخشی به کودکان و توجه به نیازهای آنان اشاره دارد(بامریند،۱۹۹۱).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;۲- تقاضاهای والدین (کنترل رفتاری)که به تلاش والدین برای یکپارچگی خانواده و جذب فرزندان درخانواده ازطریق داشتن تقاضاهای متناسب با توانایی‌های فرزندان، نظارت برآنان و وضع مقررات اشاره دارد(بامریند،۱۹۹۱).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;سبک مقتدرانه&lt;/strong&gt;: فرزندپروری مقتدرانه با تقاضاها وپاسخ دهی بالای والدین مشخص می‌گردد.والدین مقتدر معمولا”مقررات سختی برای فرزندانشان وضع می‌کنند وبراجرای آن پافشاری می نمایند.آنان فرزندانشان را تشویق می‌کنند که مستقل باشند،علاقه زیادی به پیشرفت فرزندان خود دارند،بازخوردهای مثبتی نسبت به پیشرفت آنان نشان می‌دهند(بامریند،۱۹۹۱). باربر&lt;sup&gt;[۲۳]&lt;/sup&gt; (۱۹۹۶) معتقد است خصوصیات اصلی این شیوه فرزندپروری شامل مشارکت و علاقه زیاد والدین به زندگی فرزندان، برقراری ارتباط باز با آن ها، داشتن اطمینان به آن ها، تشویق و ارتقای سلامت روانی و کنترل بالای رفتاری آن ها‌ است شامل آگاهی از این که فرزندانشان کجا هستند، با چه کسانی می‌باشند و چه کاری انجام می‌دهند.این والدین به اندازه کافی با شیوه های مختلف فیزیکی و کلامی با فرزندانشان صحبت می‌کنند. آن ها بین فرزندانشان تبعیض قایل نمی شوند .برخورد آنان با فرزندانشان احترام آمیز است و در این زمینه تظاهرنمی کنند. آن ها در رفتارهای منزل به کودک حق انتخاب می‌دهند تا آگاهانه رفتارهای مناسب را انجام دهد. آن ها زمان زیادی را صرف آموزش مسئولیت پذیری برای کودکان می‌کنند و تلاش می نمایند تا فرزندانشان به استقلال بیشتری دست یابند(سانتراک، ۲۰۰۷).این والدین هنگام مسئولیت دادن به کودکان نحوه اجرای آن را نیز آموزش می‌دهند. در این خانواده ها معمولا” افراط و تفریط وجود ندارد،یعنی نه در محبت کردن افراط می‌کنند و نه در اعمال قوانین. این والدین به جای قوانین بسیار زیاد ،ارزش‌ها را به کودکان آموزش می‌دهند این والدین معتقدند که پرورش و تربیت کودک امری اکتسابی است که از طریق تلاش بهبود می‌یابد، لذا هر گونه تلاشی را در جهت آموزش مسایل تربیتی می نمایند. قوانینشان به هیچ وجه برای کودکان آسیب رساننده نمی باشد ولی پیامدهای معقولانه رفتار را حتما اعمال می‌کنند ،لذا میتوان این پدران و مادران را والدین قاطع یادمکراتیک نامید ،یعنی اگر به کودک بگویند “درصورتی که با من بد صحبت کنی ،من خواسته هایت را انجام نمی دهم”، حتما این کار را انجام می‌دهند(سانتراک، ۲۰۰۷).این والدین همچنین به نوجوانان خود کمک می‌کنند در برخورد با هر موضوعی همه جوانب را بسنجند،از این که فرزندانشان برخی از مسائل را بهتر از آنان بشناسند، احساس رضایت می‌کنند٬ درباره مسائل فرهنگی، اجتماعی و اقتصادی با فرزندانشان گفتگو می‌کنند. وقتی فرزندان نمرات خوبی می گیرند و موفقیتی به دست می آورند به آنان پاداش و آزادی بیشتری می‌دهند و اگر نمرات پایین بگیرند با تشویق آنان به فعالیت بیشتر آن ها را کمک می‌کنند و آزادی آنان را محدودتر می‌کنند .والدین مقتدردرحالیکه روش های کنترلی را برفرزندان خوداعمال می‌کنند،‌در مورد انجام آن توضیح می دهندوهمچنین روش های تقویتی را برای تغییر رفتارکودکان خود به کارمی گیرند.در این سبک مجموعه ای ‌از حمایت اجتماعی،ارتباط دو سویه، پذیرندگی، ‌پاسخ‌گویی‌، شکیبایی و خشنودی نسبت به فرزندان دیده می شود(کوریدو،وارنرو ایبرگ،۲۰۰۲&lt;sup&gt;[۲۴]&lt;/sup&gt;).شیوه فرزند پروری مقتدرانه دارای سه بعد یا مؤلفه‌ ارتباطی حمایتگر و پذیرا&lt;sup&gt;[۲۵]&lt;/sup&gt;)،نظم(کنترل&lt;sup&gt;[۲۶]&lt;/sup&gt;)،وخودمختاری&lt;sup&gt;[۲۷]&lt;/sup&gt;(مشارکت آزادانه)است.ویژگی ارتباطی (حمایتی وپذیرا)که حمایت هیجانی،ارتباط دو سویه ،محیطی منعطف،همراه باپاسخدهی والدین را شامل می شود.ویژگی نظم(کنترل)در شیوه اقتدارمنش،پاسخدهی منطقی برای انجام امور،فراهم سازی محیطی برای مشخص شدن نتایج رفتار در فرزندان می‌باشد . ویژگی خودمختاری،فراهم نمودن محیطی برای بیان احساسات وعقاید فرزندان و استفاده از نظرات آنان در ایجاد قواعد خانوادگی است(هارتوپ ولارسن&lt;sup&gt;[۲۸]&lt;/sup&gt;،۱۹۹۹).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;img src=&#039;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/02/Investment-Economics-129.jpg&#039; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;سبک مستبدانه: فرزندپروری مستبدانه با نقاضاهای بالای والدین و پاسخدهی کم آنان مشخص می شود.والدین مستبدانتظارات بسیار بالایی از فرزندان خود دارند و در تعامل با فرزندان عواطف اندکی نشان می‌دهند(سانتراک، ۲۰۰۷).این والدین لزومی برای ارائه دلیل جهت دستورات خویش نمی بینند و براطاعت واحترام بی چون وچرای فرزندان تأکید می‌کنند.والدین مستبد،اغلب فرزندان خود را تحقیر می‌کنند و ‌در مورد تنبیه به کارگرفته شده ،هیچ گونه توضیحی نمی دهند واجرای تادیب های قوی ،سبب اختلال در پردازش کودکان نسبت به پیامهاو صحبتهای والدین ودیگران می شودوآنان در ترس دایم به سر می‌برند(باربر،۲۰۰۰؛لایبل وتامپسون&lt;sup&gt;[۲۹]&lt;/sup&gt;،۲۰۰۲).سبک والدین مستبد نیزداری سه مؤلفه‌ اجبار فیزیکی&lt;sup&gt;[۳۰]&lt;/sup&gt;،خصومت کلامی&lt;sup&gt;[۳۱]&lt;/sup&gt;،تنبیه و غیرتوضیحی&lt;sup&gt;[۳۲]&lt;/sup&gt;است.بعد اجبار فیزیکی به معنای به کارگیری فراوان تنبیهات نامشخص و خشن،همراه با کنترل زیاد و پذیرندگی پایین برای فرزندان می‌باشد.بعد خصومت کلامی با به کار گیری انتقادهای مخرب برای ایجاد نظم در فرزندان مشخص می شود و بعد تنبیه وغیر توضیحی با به کارگیری تنبیهات وحقیر کردن فرزندان با ارائه توضیحی بسیار اندک ویا بدون آن می‌باشد(لایبل وتامپسون،۲۰۰۲).&lt;/p&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div class=&quot;item_footer&quot;&gt;&lt;p&gt;&lt;small&gt;&lt;a href=&quot;https://yi.kowsarblog.ir/دانلود-پایان-نامه-های-آماده-سبک-مقتدرانه-nn3&quot;&gt;مطلب اصلی&lt;/a&gt; در &lt;a href=&quot;http://kowsarblog.ir/&quot;&gt;کوثربلاگ &lt;/a&gt;ارسال شده است.&lt;/small&gt;&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;</description>
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<p><img src='https://ziso.ir/wp-content/uploads/2022/06/problem-solving-49.jpg' /></p>
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<p>دوم:پژوهش های مربوط به ارتباط والدین با کودک که نگرش ها واعمال والدین را در فرایند فرزند پروری مورد بررسی قرار داده‌اند.روش های متفاوتی برای فرزندپروری مطرح شده اند؛ازیک دیدگاه فرزندپروری به سه روش تقسیم شده است که بر تقاضاها وپاسخدهی والدین مبتنی است وعبارتنداز:</p>
<p><img src='https://ziso.ir/wp-content/uploads/2022/11/pics_24_50.png' /></p>
<p><a href='https://shivadanesh.ir/'> <img src='https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/10/S-11.png' /></a></p>
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<p>۱-شیوه مقتدرانه،۲-شیوه سهل گیرانه،۳-شیوه مستبدانه(مک کی<sup>[۲۲]</sup>، ۲۰۰۶).سبک های فرزندپروری واجد دو مؤلفه‌ اساسی هستند:</p>
<p> </p>
<p>۱- پاسخدهی(صمیمیت واطمینان بخشی)که به میزان تلاش والدین برای رشد ابراز وجود واستقلال ‌در کودکان ،حمایت واطمینان بخشی به کودکان و توجه به نیازهای آنان اشاره دارد(بامریند،۱۹۹۱).</p>
<p> </p>
<p>۲- تقاضاهای والدین (کنترل رفتاری)که به تلاش والدین برای یکپارچگی خانواده و جذب فرزندان درخانواده ازطریق داشتن تقاضاهای متناسب با توانایی‌های فرزندان، نظارت برآنان و وضع مقررات اشاره دارد(بامریند،۱۹۹۱).</p>
<p> </p>
<p><strong>سبک مقتدرانه</strong>: فرزندپروری مقتدرانه با تقاضاها وپاسخ دهی بالای والدین مشخص می‌گردد.والدین مقتدر معمولا”مقررات سختی برای فرزندانشان وضع می‌کنند وبراجرای آن پافشاری می نمایند.آنان فرزندانشان را تشویق می‌کنند که مستقل باشند،علاقه زیادی به پیشرفت فرزندان خود دارند،بازخوردهای مثبتی نسبت به پیشرفت آنان نشان می‌دهند(بامریند،۱۹۹۱). باربر<sup>[۲۳]</sup> (۱۹۹۶) معتقد است خصوصیات اصلی این شیوه فرزندپروری شامل مشارکت و علاقه زیاد والدین به زندگی فرزندان، برقراری ارتباط باز با آن ها، داشتن اطمینان به آن ها، تشویق و ارتقای سلامت روانی و کنترل بالای رفتاری آن ها‌ است شامل آگاهی از این که فرزندانشان کجا هستند، با چه کسانی می‌باشند و چه کاری انجام می‌دهند.این والدین به اندازه کافی با شیوه های مختلف فیزیکی و کلامی با فرزندانشان صحبت می‌کنند. آن ها بین فرزندانشان تبعیض قایل نمی شوند .برخورد آنان با فرزندانشان احترام آمیز است و در این زمینه تظاهرنمی کنند. آن ها در رفتارهای منزل به کودک حق انتخاب می‌دهند تا آگاهانه رفتارهای مناسب را انجام دهد. آن ها زمان زیادی را صرف آموزش مسئولیت پذیری برای کودکان می‌کنند و تلاش می نمایند تا فرزندانشان به استقلال بیشتری دست یابند(سانتراک، ۲۰۰۷).این والدین هنگام مسئولیت دادن به کودکان نحوه اجرای آن را نیز آموزش می‌دهند. در این خانواده ها معمولا” افراط و تفریط وجود ندارد،یعنی نه در محبت کردن افراط می‌کنند و نه در اعمال قوانین. این والدین به جای قوانین بسیار زیاد ،ارزش‌ها را به کودکان آموزش می‌دهند این والدین معتقدند که پرورش و تربیت کودک امری اکتسابی است که از طریق تلاش بهبود می‌یابد، لذا هر گونه تلاشی را در جهت آموزش مسایل تربیتی می نمایند. قوانینشان به هیچ وجه برای کودکان آسیب رساننده نمی باشد ولی پیامدهای معقولانه رفتار را حتما اعمال می‌کنند ،لذا میتوان این پدران و مادران را والدین قاطع یادمکراتیک نامید ،یعنی اگر به کودک بگویند “درصورتی که با من بد صحبت کنی ،من خواسته هایت را انجام نمی دهم”، حتما این کار را انجام می‌دهند(سانتراک، ۲۰۰۷).این والدین همچنین به نوجوانان خود کمک می‌کنند در برخورد با هر موضوعی همه جوانب را بسنجند،از این که فرزندانشان برخی از مسائل را بهتر از آنان بشناسند، احساس رضایت می‌کنند٬ درباره مسائل فرهنگی، اجتماعی و اقتصادی با فرزندانشان گفتگو می‌کنند. وقتی فرزندان نمرات خوبی می گیرند و موفقیتی به دست می آورند به آنان پاداش و آزادی بیشتری می‌دهند و اگر نمرات پایین بگیرند با تشویق آنان به فعالیت بیشتر آن ها را کمک می‌کنند و آزادی آنان را محدودتر می‌کنند .والدین مقتدردرحالیکه روش های کنترلی را برفرزندان خوداعمال می‌کنند،‌در مورد انجام آن توضیح می دهندوهمچنین روش های تقویتی را برای تغییر رفتارکودکان خود به کارمی گیرند.در این سبک مجموعه ای ‌از حمایت اجتماعی،ارتباط دو سویه، پذیرندگی، ‌پاسخ‌گویی‌، شکیبایی و خشنودی نسبت به فرزندان دیده می شود(کوریدو،وارنرو ایبرگ،۲۰۰۲<sup>[۲۴]</sup>).شیوه فرزند پروری مقتدرانه دارای سه بعد یا مؤلفه‌ ارتباطی حمایتگر و پذیرا<sup>[۲۵]</sup>)،نظم(کنترل<sup>[۲۶]</sup>)،وخودمختاری<sup>[۲۷]</sup>(مشارکت آزادانه)است.ویژگی ارتباطی (حمایتی وپذیرا)که حمایت هیجانی،ارتباط دو سویه ،محیطی منعطف،همراه باپاسخدهی والدین را شامل می شود.ویژگی نظم(کنترل)در شیوه اقتدارمنش،پاسخدهی منطقی برای انجام امور،فراهم سازی محیطی برای مشخص شدن نتایج رفتار در فرزندان می‌باشد . ویژگی خودمختاری،فراهم نمودن محیطی برای بیان احساسات وعقاید فرزندان و استفاده از نظرات آنان در ایجاد قواعد خانوادگی است(هارتوپ ولارسن<sup>[۲۸]</sup>،۱۹۹۹).</p>
<p><img src='https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/02/Investment-Economics-129.jpg' /></p>
<p>سبک مستبدانه: فرزندپروری مستبدانه با نقاضاهای بالای والدین و پاسخدهی کم آنان مشخص می شود.والدین مستبدانتظارات بسیار بالایی از فرزندان خود دارند و در تعامل با فرزندان عواطف اندکی نشان می‌دهند(سانتراک، ۲۰۰۷).این والدین لزومی برای ارائه دلیل جهت دستورات خویش نمی بینند و براطاعت واحترام بی چون وچرای فرزندان تأکید می‌کنند.والدین مستبد،اغلب فرزندان خود را تحقیر می‌کنند و ‌در مورد تنبیه به کارگرفته شده ،هیچ گونه توضیحی نمی دهند واجرای تادیب های قوی ،سبب اختلال در پردازش کودکان نسبت به پیامهاو صحبتهای والدین ودیگران می شودوآنان در ترس دایم به سر می‌برند(باربر،۲۰۰۰؛لایبل وتامپسون<sup>[۲۹]</sup>،۲۰۰۲).سبک والدین مستبد نیزداری سه مؤلفه‌ اجبار فیزیکی<sup>[۳۰]</sup>،خصومت کلامی<sup>[۳۱]</sup>،تنبیه و غیرتوضیحی<sup>[۳۲]</sup>است.بعد اجبار فیزیکی به معنای به کارگیری فراوان تنبیهات نامشخص و خشن،همراه با کنترل زیاد و پذیرندگی پایین برای فرزندان می‌باشد.بعد خصومت کلامی با به کار گیری انتقادهای مخرب برای ایجاد نظم در فرزندان مشخص می شود و بعد تنبیه وغیر توضیحی با به کارگیری تنبیهات وحقیر کردن فرزندان با ارائه توضیحی بسیار اندک ویا بدون آن می‌باشد(لایبل وتامپسون،۲۰۰۲).</p>
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</div><div class="item_footer"><p><small><a href="https://yi.kowsarblog.ir/دانلود-پایان-نامه-های-آماده-سبک-مقتدرانه-nn3">مطلب اصلی</a> در <a href="http://kowsarblog.ir/">کوثربلاگ </a>ارسال شده است.</small></p></div>]]></content:encoded>
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<item rdf:about="https://yi.kowsarblog.ir/تحقیق-پروژه-و-پایان-نامه-قسمت-19-nn3">
	<title>تحقیق-پروژه و پایان نامه | قسمت 19 – 3</title>
	<link>https://yi.kowsarblog.ir/تحقیق-پروژه-و-پایان-نامه-قسمت-19-nn3</link>
	<dc:date>1401-09-23T08:13:00Z</dc:date>	<dc:creator>نویسنده محمدی</dc:creator>
	<dc:subject>بدون موضوع</dc:subject>
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&lt;div&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;مدل تقاضا – کنترل شغلی فرض را براین گذاشته است که منابع اولیه فشار روانی، درون دو ویژگی اساسی شغلی قرار دارند: توقعات روانی از شغل و آزادی عمل در تصمیم گیری شغلی. با توجه ‌به این مدل، مشاغلی که به طور معمول میزان بالایی از واکنش های فشار روانی شغلی را نشان می ‏دهند (مانند خستگی و بیماری قلبی و عروقی)، مشاغلی هستند که ترکیبی از توقعات بالا و آزادی عمل در تصمیم‏ گیری پایین می‏ باشند. این ترکیب فشار بالا نامیده می‏ شود (ربع اول مربع). موفعیت مخاف نیز فشار پایین نام دارد، یعنی مشاغلی را شامل می‎شود که در آن‏ها توقعات شغلی پایین و آزادی عمل در تصمیم‏ گیری بالا می‏ باشد (ربع سوم مربع). در این موقعیت مدل واکنش‎های فشار روانی پایین‏تر از متوسط را پیش‎بینی می‎کند.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;img src=&#039;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2022/11/pics_19_50.png&#039; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href=&#039;https://fekreshad.ir/&#039;&gt; &lt;img src=&#039;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/10/THESIS-PAPER-12.png&#039; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;دومین فرضیه مهم مدل تقاضا این است که انگیزش، یادگیری و رشد شخصی در موقعیت های که هم توقعات شغلی و هم میزان آزادی عمل در تصمیم‏ گیری بالا است (مشاغل فعال) رخ می‏ دهد (ربع دوم مربع). این فرضیه به آنچه که فشار روانی خوب خوانده می‏ شود نزدیک است. ار آن‏ جای که فشارزاهای شغلی به عمل مستقیم برمی‏گردد، احساس می‎شود که مقدار کمی فشار می‎تواند باعث ایجاد استرس شغلی شود. متضاد این ضعیت در شغل‏های منفعل دیده می‏ شود که در آن‏ها مهارت‏ها و توانایی‏ها تحلیل می‏‏‏‏‏‏‏‏‏‏‏‏‏‏‏‏‏رود (ربع چهارم مربع). تقاضاهای روانی و آزادی در تصمیم‏ گیری بر دو مکانیسم روانشناختی تأثیر می‏ گذارد که با قطرهای A و B در شکل ۲-۲ نشان داده شده اند. مکانیزم نخست بر سلامتی کارمند تأثیر دارد (قطر A) در حالی که دیگری بر انگیزش کار و رفتارهای آموخته شده کارمند تأثیر دارد (قطر B) ( اشمایل، ۲۰۰۹).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Moorhead ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– National Enntitue of occupational sefet &amp;amp;z Health ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;-Pawlik-kienlen ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Miller ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Saks &amp;amp; et al, ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Yousef ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Schwepker ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– John &amp;amp; Charles ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Chy koh &amp;amp; Boo ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Petty, Roger B. Hill ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– work ethics ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– professional ethics ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– wiliams ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Jaramillo, F, Mulki, J, Soloman, P ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Satish, P. Deshpande- ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Vardi, y ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Woehr, D., Luis M. A &amp;amp; Doo H. L ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– McCalister, et all ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Petti John, M., Charles. B ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Okpara, J.O., Wynn, P ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Svensson. G, Wood. G ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Porter, etc ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Chatman, Oraili ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– sheldoon ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– salansic ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– shaw ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Organizational commitment ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Allen, N.J., &amp;amp; Meyer ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Randal &amp;amp; kuti ↑&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Walton ↑&lt;/li&gt;
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&lt;/li&gt;
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&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
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&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;– Angle&amp;amp;Perry ↑&lt;/li&gt;
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&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
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&lt;li&gt;
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&lt;li&gt;– PENLEY&amp;amp;GOULD ↑&lt;/li&gt;
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&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
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&lt;li&gt;– R RAS, Randal ↑&lt;/li&gt;
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&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
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&lt;li&gt;– Jamal ↑&lt;/li&gt;
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&lt;/li&gt;
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&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
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&lt;li&gt;
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&lt;li&gt;– park ↑&lt;/li&gt;
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&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
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&lt;li&gt;
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&lt;li&gt;– Chmiel ↑&lt;/li&gt;
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&lt;/li&gt;
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&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
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&lt;/div&gt;&lt;div class=&quot;item_footer&quot;&gt;&lt;p&gt;&lt;small&gt;&lt;a href=&quot;https://yi.kowsarblog.ir/تحقیق-پروژه-و-پایان-نامه-قسمت-19-nn3&quot;&gt;مطلب اصلی&lt;/a&gt; در &lt;a href=&quot;http://kowsarblog.ir/&quot;&gt;کوثربلاگ &lt;/a&gt;ارسال شده است.&lt;/small&gt;&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;</description>
	<content:encoded><![CDATA[<div class='story' data-id='1557162719' data-words='443' id='story'>
<div>
<p> </p>
<p>مدل تقاضا – کنترل شغلی فرض را براین گذاشته است که منابع اولیه فشار روانی، درون دو ویژگی اساسی شغلی قرار دارند: توقعات روانی از شغل و آزادی عمل در تصمیم گیری شغلی. با توجه ‌به این مدل، مشاغلی که به طور معمول میزان بالایی از واکنش های فشار روانی شغلی را نشان می ‏دهند (مانند خستگی و بیماری قلبی و عروقی)، مشاغلی هستند که ترکیبی از توقعات بالا و آزادی عمل در تصمیم‏ گیری پایین می‏ باشند. این ترکیب فشار بالا نامیده می‏ شود (ربع اول مربع). موفعیت مخاف نیز فشار پایین نام دارد، یعنی مشاغلی را شامل می‎شود که در آن‏ها توقعات شغلی پایین و آزادی عمل در تصمیم‏ گیری بالا می‏ باشد (ربع سوم مربع). در این موقعیت مدل واکنش‎های فشار روانی پایین‏تر از متوسط را پیش‎بینی می‎کند.</p>
<p><img src='https://ziso.ir/wp-content/uploads/2022/11/pics_19_50.png' /></p>
<p><a href='https://fekreshad.ir/'> <img src='https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/10/THESIS-PAPER-12.png' /></a></p>
<p> </p>
<p>دومین فرضیه مهم مدل تقاضا این است که انگیزش، یادگیری و رشد شخصی در موقعیت های که هم توقعات شغلی و هم میزان آزادی عمل در تصمیم‏ گیری بالا است (مشاغل فعال) رخ می‏ دهد (ربع دوم مربع). این فرضیه به آنچه که فشار روانی خوب خوانده می‏ شود نزدیک است. ار آن‏ جای که فشارزاهای شغلی به عمل مستقیم برمی‏گردد، احساس می‎شود که مقدار کمی فشار می‎تواند باعث ایجاد استرس شغلی شود. متضاد این ضعیت در شغل‏های منفعل دیده می‏ شود که در آن‏ها مهارت‏ها و توانایی‏ها تحلیل می‏‏‏‏‏‏‏‏‏‏‏‏‏‏‏‏‏رود (ربع چهارم مربع). تقاضاهای روانی و آزادی در تصمیم‏ گیری بر دو مکانیسم روانشناختی تأثیر می‏ گذارد که با قطرهای A و B در شکل ۲-۲ نشان داده شده اند. مکانیزم نخست بر سلامتی کارمند تأثیر دارد (قطر A) در حالی که دیگری بر انگیزش کار و رفتارهای آموخته شده کارمند تأثیر دارد (قطر B) ( اشمایل، ۲۰۰۹).</p>
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<li>– Moorhead ↑</li>
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<li>– National Enntitue of occupational sefet &amp;z Health ↑</li>
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<li>-Pawlik-kienlen ↑</li>
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<li>– Miller ↑</li>
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<li>– Saks &amp; et al, ↑</li>
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<li>– Yousef ↑</li>
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<li>– Schwepker ↑</li>
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<li>– John &amp; Charles ↑</li>
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<li>– Chy koh &amp; Boo ↑</li>
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<li>– Petty, Roger B. Hill ↑</li>
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<li>– work ethics ↑</li>
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<li>– professional ethics ↑</li>
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<li>– wiliams ↑</li>
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<li>– Jaramillo, F, Mulki, J, Soloman, P ↑</li>
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<li>– Satish, P. Deshpande- ↑</li>
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<li>– Vardi, y ↑</li>
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<li>– Woehr, D., Luis M. A &amp; Doo H. L ↑</li>
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<li>– McCalister, et all ↑</li>
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<li>– Petti John, M., Charles. B ↑</li>
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<li>– Okpara, J.O., Wynn, P ↑</li>
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<li>– Svensson. G, Wood. G ↑</li>
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<li>– Porter, etc ↑</li>
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<li>– Chatman, Oraili ↑</li>
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<li>– sheldoon ↑</li>
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<li>– salansic ↑</li>
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<li>– shaw ↑</li>
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<li>– Organizational commitment ↑</li>
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<li>– Allen, N.J., &amp; Meyer ↑</li>
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<li>– Randal &amp; kuti ↑</li>
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<li>– Walton ↑</li>
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<li>– Angle&amp;Perry ↑</li>
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<li>– PENLEY&amp;GOULD ↑</li>
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<li>– R RAS, Randal ↑</li>
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<li>– Jamal ↑</li>
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<li>– park ↑</li>
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<li>– Chmiel ↑</li>
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</div><div class="item_footer"><p><small><a href="https://yi.kowsarblog.ir/تحقیق-پروژه-و-پایان-نامه-قسمت-19-nn3">مطلب اصلی</a> در <a href="http://kowsarblog.ir/">کوثربلاگ </a>ارسال شده است.</small></p></div>]]></content:encoded>
			</item>

<item rdf:about="https://yi.kowsarblog.ir/دانلود-پایان-نامه-و-مقاله-قسمت-17-nn9">
	<title>دانلود پایان نامه و مقاله | قسمت 17 – 9</title>
	<link>https://yi.kowsarblog.ir/دانلود-پایان-نامه-و-مقاله-قسمت-17-nn9</link>
	<dc:date>1401-09-23T08:13:00Z</dc:date>	<dc:creator>نویسنده محمدی</dc:creator>
	<dc:subject>بدون موضوع</dc:subject>
		<description>&lt;div class=&#039;story&#039; data-id=&#039;1557085322&#039; data-words=&#039;1132&#039; id=&#039;story&#039;&gt;
&lt;div&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;‌بنابرین‏ با پذیرش مفهوم اصل مسئولیت مشترک اما متفاوت در حقوق محیط زیست بین الملل دست خواهان دعوی زیست محیطی علیه دولت در استدلال به استقرار مسئولیت برای دولت خوانده باز می شود. همچنین دادگاه رسیدگی کننده با نظر داشتن به اصل مذبور می‌تواند در راه کشف وظایف و تفسیر تعهدات دولت خوانده دعوی بسته به اینکه از کشورهای توسعه یافته باشد یا کشورهای در حال توسعه به نتیجه سازگارتری با اصول حقوق محیط زیست بین الملل دست یابد. ‌بنابرین‏ دولت خوانده دعوی زیست محیطی چنانچه از کشورهای در حال توسعه باشد و در موضوع پرونده مطروحه در مظان اتهام باشد، می‌تواند اصل مذبور را برای دفاع از خود نیز مورد استناد قرار دهد. بدین توضیح که چنانچه طبق اصل مذبور اجرای تعهدات دولت خوانده منوط به ایفای تعهدات دولت دیگری باشد، دولت خوانده می‌تواند با استناد به توافق حاصله، تعهد به جبران خسارت را لااقل نسبت به بخشی از آن به عهده دولت ثالث متخلف منتقل نماید.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;img src=&#039;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2022/11/pics_4_50.png&#039; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href=&#039;https://feko.ir/&#039;&gt; &lt;img src=&#039;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/10/S_39_32.png&#039; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;همچنین اصل مذبور می‌تواند مستقیماً مبنای طرح دعوا زیست محیطی علیه یک دولت را فراهم آورد. بدین صورت که دولت متعهدٌله ‌بر اساس توافق بین‌المللی می‌تواند الزام دولت متعهد را نسبت به اجرای تعهدات خود از دادگاه صالح مطالبه نماید.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;h5&gt;۲) اصل پیش گیری&lt;/h5&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;همان طور که پیش تر اشاره شد اصول حقوقی محیط زیست بین الملل به طور کلی از منابع آن به شمار می‌آیند. لیکن برخی از اصول و قواعدی را که به طور مستقیم امکان طرح یک دعوی زیست محیطی علیه دولت را فراهم می آورد شایسته است از منظر مبنای طرح دعوای زیست محیطی نیز مورد بررسی قرار داد. یکی از اصول مذبور اصل پیش گیری است. این اصل یکی از اصول بنیادین در حقوق محیط زیست به شمار می‌آید. چرا که تضمین کننده بقا و تداوم تنوع زیستی گونه های گیاه و جانوری مختلف می‌باشد. برخی از گونه های مذبور در صورت نابودی غیرقابل بازگشت و جبران ناپذیر هستند.&lt;sup&gt;[۱۰۲] &lt;/sup&gt;‌بنابرین‏ اصل پیش گیری را می توان به عنوان یکی از مهم ترین منابع طرح دعوی زیست محیطی علیه دولت ها مورد استفاده و استناد قرار داد. از آن جایی که این اصل از اهمیت به سزایی در امور زیست محیطی برخوردار است، در معاهدات بین‌المللی همواره تعهداتی پیش گیرانه برای دولت های متعاهد وضع می‌گردد. از سوی دیگر در قبال این تعهدات، امتیازاتی نیز برای آن دولت ها در نظر گرفته می شود. بنابر آنچه گفتیم اصل پیش گیری می‌تواند مستقیماً منبع طرح دعوی الزام به انجام تعهدات زیست محیطی علیه دولت متخلف باشد. دادگاه نیز موظف است با تمسک به نتایج حاصل از اصل پیش گیری اقدامات لازم را من جمله صدور دستور موقت و یا احکام قطعی در خصوص جلوگیری از ادامه فعالیت های احتمالاً مضر زیست محیطی به عمل آورد. ‌بنابرین‏ اصل پیش گیری هم در مرحله طرح دعوا می‌تواند از منابع و مستندات خواهان باشد و هم در مرحله رسیدگی و صدور رأی‌ می بایست بسیار مورد توجه مقام رسیدگی کننده به دعوا قرار گیرد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;همچنین دادگاه می‌تواند پس از بررسی کارشناسانه فعالیت موضوع دعوی زیست محیطی به دولت خوانده مهلت کافی جهت نائل شدن با استانداردهای تعیین شده قبلی را بدهد و در صورت انقضای مهلت مذبور و عدم جلب نظر مقام نظارت کننده تعیینی از جانب دادگاه نسبت به صدور حکم جلوگیری از ادامه فعالیت مذبور اقدام به صدور حکم نماید. اتخاذ چنین تصمیمی می‌تواند در قالب صدور دستور موقت به تقاضای خواهان دعوی زیست محیطی علیه دولت صورت پذیرد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;h5&gt;۳) اصل احتیاط&lt;/h5&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;اصل احتیاط یکی از اصول نزدیک به اصل پیش گیری به لحاظ کاربردی می‌باشد لیکن دارای مفهوم متمایزی نسبت به آن می‌باشد. این اصل نیز می‌تواند در طرح دعوی زیست محیطی علیه دولت مبنای اقامه دعوی قرار گیرد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;معنا و مفهوم این اصل در حقوق محیط زیست بین الملل جلوگیری از انجام اعمالی است که دانشمندان و کارشناسان محیط زیست هنوز در خصوص زیان بار بودن یا نبودن آن اعمال برای محیط زیست به قطعیت و یقین علمی نرسیده اند و آن موضوع را یا در دست بررسی دارند و یا اینکه موضوع متنازع فیه تا به حال از دید آثار ممکنه بر محیط زیست مورد بررسی قرار نگرفته است لیکن فی الحال به نظر فعالان محیط زیست که در مقام خواهان دعوی زیست محیطی علیه دولت اقدام می‌کنند مشکوک به زیان بار بودن به نظر می‌آید. در چنین مواردی فعالان محیط زیست می‌توانند با تمسک به اصل احتیاط از مرجع صالح تقاضای پیش گیری یا توقف ادامه فعالیت مذبور را درخواست نمایند.&lt;sup&gt;[۱۰۳]&lt;/sup&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در تمییز اصل پیش گیری از اصل احتیاط و مبنا قرار دادن آن در طرح یک دعوی زیست محیطی علیه دولت بسیار باید دقت نمود. چرا که انتخاب مبنای غیر دقیق برای طرح یک شکایت یا تقدیم دادخواست حقوقی می‌تواند موجبات دفاع را برای دولت خوانده و همچنین شکست دعوی در دادگاه را فراهم آورد. ‌بنابرین‏ باید توجه داشت اصل پیش گیری در مواردی می‌تواند مبنای طرح دعوی و یا درخواست صدور دستور موقت قرار گیرد که اعمال ارتکابی دولت خوانده دعوی از نظر زیست محیطی بالقوه یا بالفعل زیان بار تلقی و ضرر آن برای محیط زیست لااقل از دیدگاه خواهان دعوی حتمی و جزمی باشد. این در حالی است که اصل احتیاط در مقایسه با اصل پیش گیری زمانی می‌تواند مبنای طرح دعوی زیست محیطی علیه دولت قرار گیرد که اعمال ارتکابی دولت خوانده دعوا نه یقیناً بلکه احتمالاً برای محیط زیست دارای پیامدهای منفی می‌باشد و در خصوص زیان بار بودن یا نبودن فعل متنازعٌ فیه علم و یقین کافی وجود نداشته باشد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;در چنین مواردی است که دادگاه رسیدگی کننده به درخواست مذبور می بایست با لحاظ قرار دادن خصیصه ضرر احتمالی و مورد ادعای خواهان دعوی زیست محیطی علیه دولت و میزان جبران ناپذیری آن برای محیط زیست از نظر امکان اعاده آن به وضع سابق؛ در صورت صلاح دید دستور توقف عملیات مذبور را تا انجام شدن تحقیقات و کارشناسی کافی در خصوص موضوع صادر نموده و مانع از ورود خسارت زیست محیطی گردد.&lt;sup&gt;[۱۰۴]&lt;/sup&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;h5&gt;۴) اصل آلوده کننده_ پرداخت کننده&lt;/h5&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;یکی از اصول مهم در زمینه حقوق محیط زیست بین الملل اصل آلوده کننده پرداخت کننده می‌باشد. بر خلاف آنچه از عنوان این اصل به ذهن متبادر می شود اجرای این اصل مربوط می شود به قبل از بروز آلودگی. معنا و مفهوم این اصل این است که شخص ذی نفع در یک پروژه اقتصادی یا صنعتی که احتمال ایجاد آلودگی زیست محیطی را دارد، می بایست متقبل هزینه های مربوط به تدابیر پیش گیری از آلودگی مذبور گردد. بدین ترتیب قبل از ورود خسارت زیست محیطی از آلوده کننده احتمالی هزینه های پیش گیری از آن اخذ می‌گردد. با این روش هم از بروز آسیب زیست محیطی جلوگیری به عمل می‌آید و هم هزینه های پیش گیری به مراتب کمتر از هزینه جبران ضرر و زیان ناشی از آلودگی مورد بحث خواهد بود. این اصل تضمین کننده استفاده منطقی از منابع محدود محیط زیست است و مانع از بروز هر گونه تغییر نامطلوب در آن می‌گردد.&lt;sup&gt;[۱۰۵]&lt;/sup&gt;&lt;/p&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div class=&quot;item_footer&quot;&gt;&lt;p&gt;&lt;small&gt;&lt;a href=&quot;https://yi.kowsarblog.ir/دانلود-پایان-نامه-و-مقاله-قسمت-17-nn9&quot;&gt;مطلب اصلی&lt;/a&gt; در &lt;a href=&quot;http://kowsarblog.ir/&quot;&gt;کوثربلاگ &lt;/a&gt;ارسال شده است.&lt;/small&gt;&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;</description>
	<content:encoded><![CDATA[<div class='story' data-id='1557085322' data-words='1132' id='story'>
<div>
<p> </p>
<p>‌بنابرین‏ با پذیرش مفهوم اصل مسئولیت مشترک اما متفاوت در حقوق محیط زیست بین الملل دست خواهان دعوی زیست محیطی علیه دولت در استدلال به استقرار مسئولیت برای دولت خوانده باز می شود. همچنین دادگاه رسیدگی کننده با نظر داشتن به اصل مذبور می‌تواند در راه کشف وظایف و تفسیر تعهدات دولت خوانده دعوی بسته به اینکه از کشورهای توسعه یافته باشد یا کشورهای در حال توسعه به نتیجه سازگارتری با اصول حقوق محیط زیست بین الملل دست یابد. ‌بنابرین‏ دولت خوانده دعوی زیست محیطی چنانچه از کشورهای در حال توسعه باشد و در موضوع پرونده مطروحه در مظان اتهام باشد، می‌تواند اصل مذبور را برای دفاع از خود نیز مورد استناد قرار دهد. بدین توضیح که چنانچه طبق اصل مذبور اجرای تعهدات دولت خوانده منوط به ایفای تعهدات دولت دیگری باشد، دولت خوانده می‌تواند با استناد به توافق حاصله، تعهد به جبران خسارت را لااقل نسبت به بخشی از آن به عهده دولت ثالث متخلف منتقل نماید.</p>
<p><img src='https://ziso.ir/wp-content/uploads/2022/11/pics_4_50.png' /></p>
<p><a href='https://feko.ir/'> <img src='https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/10/S_39_32.png' /></a></p>
<p> </p>
<p>همچنین اصل مذبور می‌تواند مستقیماً مبنای طرح دعوا زیست محیطی علیه یک دولت را فراهم آورد. بدین صورت که دولت متعهدٌله ‌بر اساس توافق بین‌المللی می‌تواند الزام دولت متعهد را نسبت به اجرای تعهدات خود از دادگاه صالح مطالبه نماید.</p>
<p> </p>
<h5>۲) اصل پیش گیری</h5>
<p> </p>
<p>همان طور که پیش تر اشاره شد اصول حقوقی محیط زیست بین الملل به طور کلی از منابع آن به شمار می‌آیند. لیکن برخی از اصول و قواعدی را که به طور مستقیم امکان طرح یک دعوی زیست محیطی علیه دولت را فراهم می آورد شایسته است از منظر مبنای طرح دعوای زیست محیطی نیز مورد بررسی قرار داد. یکی از اصول مذبور اصل پیش گیری است. این اصل یکی از اصول بنیادین در حقوق محیط زیست به شمار می‌آید. چرا که تضمین کننده بقا و تداوم تنوع زیستی گونه های گیاه و جانوری مختلف می‌باشد. برخی از گونه های مذبور در صورت نابودی غیرقابل بازگشت و جبران ناپذیر هستند.<sup>[۱۰۲] </sup>‌بنابرین‏ اصل پیش گیری را می توان به عنوان یکی از مهم ترین منابع طرح دعوی زیست محیطی علیه دولت ها مورد استفاده و استناد قرار داد. از آن جایی که این اصل از اهمیت به سزایی در امور زیست محیطی برخوردار است، در معاهدات بین‌المللی همواره تعهداتی پیش گیرانه برای دولت های متعاهد وضع می‌گردد. از سوی دیگر در قبال این تعهدات، امتیازاتی نیز برای آن دولت ها در نظر گرفته می شود. بنابر آنچه گفتیم اصل پیش گیری می‌تواند مستقیماً منبع طرح دعوی الزام به انجام تعهدات زیست محیطی علیه دولت متخلف باشد. دادگاه نیز موظف است با تمسک به نتایج حاصل از اصل پیش گیری اقدامات لازم را من جمله صدور دستور موقت و یا احکام قطعی در خصوص جلوگیری از ادامه فعالیت های احتمالاً مضر زیست محیطی به عمل آورد. ‌بنابرین‏ اصل پیش گیری هم در مرحله طرح دعوا می‌تواند از منابع و مستندات خواهان باشد و هم در مرحله رسیدگی و صدور رأی‌ می بایست بسیار مورد توجه مقام رسیدگی کننده به دعوا قرار گیرد.</p>
<p> </p>
<p>همچنین دادگاه می‌تواند پس از بررسی کارشناسانه فعالیت موضوع دعوی زیست محیطی به دولت خوانده مهلت کافی جهت نائل شدن با استانداردهای تعیین شده قبلی را بدهد و در صورت انقضای مهلت مذبور و عدم جلب نظر مقام نظارت کننده تعیینی از جانب دادگاه نسبت به صدور حکم جلوگیری از ادامه فعالیت مذبور اقدام به صدور حکم نماید. اتخاذ چنین تصمیمی می‌تواند در قالب صدور دستور موقت به تقاضای خواهان دعوی زیست محیطی علیه دولت صورت پذیرد.</p>
<p> </p>
<h5>۳) اصل احتیاط</h5>
<p> </p>
<p>اصل احتیاط یکی از اصول نزدیک به اصل پیش گیری به لحاظ کاربردی می‌باشد لیکن دارای مفهوم متمایزی نسبت به آن می‌باشد. این اصل نیز می‌تواند در طرح دعوی زیست محیطی علیه دولت مبنای اقامه دعوی قرار گیرد.</p>
<p> </p>
<p>معنا و مفهوم این اصل در حقوق محیط زیست بین الملل جلوگیری از انجام اعمالی است که دانشمندان و کارشناسان محیط زیست هنوز در خصوص زیان بار بودن یا نبودن آن اعمال برای محیط زیست به قطعیت و یقین علمی نرسیده اند و آن موضوع را یا در دست بررسی دارند و یا اینکه موضوع متنازع فیه تا به حال از دید آثار ممکنه بر محیط زیست مورد بررسی قرار نگرفته است لیکن فی الحال به نظر فعالان محیط زیست که در مقام خواهان دعوی زیست محیطی علیه دولت اقدام می‌کنند مشکوک به زیان بار بودن به نظر می‌آید. در چنین مواردی فعالان محیط زیست می‌توانند با تمسک به اصل احتیاط از مرجع صالح تقاضای پیش گیری یا توقف ادامه فعالیت مذبور را درخواست نمایند.<sup>[۱۰۳]</sup></p>
<p> </p>
<p>در تمییز اصل پیش گیری از اصل احتیاط و مبنا قرار دادن آن در طرح یک دعوی زیست محیطی علیه دولت بسیار باید دقت نمود. چرا که انتخاب مبنای غیر دقیق برای طرح یک شکایت یا تقدیم دادخواست حقوقی می‌تواند موجبات دفاع را برای دولت خوانده و همچنین شکست دعوی در دادگاه را فراهم آورد. ‌بنابرین‏ باید توجه داشت اصل پیش گیری در مواردی می‌تواند مبنای طرح دعوی و یا درخواست صدور دستور موقت قرار گیرد که اعمال ارتکابی دولت خوانده دعوی از نظر زیست محیطی بالقوه یا بالفعل زیان بار تلقی و ضرر آن برای محیط زیست لااقل از دیدگاه خواهان دعوی حتمی و جزمی باشد. این در حالی است که اصل احتیاط در مقایسه با اصل پیش گیری زمانی می‌تواند مبنای طرح دعوی زیست محیطی علیه دولت قرار گیرد که اعمال ارتکابی دولت خوانده دعوا نه یقیناً بلکه احتمالاً برای محیط زیست دارای پیامدهای منفی می‌باشد و در خصوص زیان بار بودن یا نبودن فعل متنازعٌ فیه علم و یقین کافی وجود نداشته باشد.</p>
<p> </p>
<p>در چنین مواردی است که دادگاه رسیدگی کننده به درخواست مذبور می بایست با لحاظ قرار دادن خصیصه ضرر احتمالی و مورد ادعای خواهان دعوی زیست محیطی علیه دولت و میزان جبران ناپذیری آن برای محیط زیست از نظر امکان اعاده آن به وضع سابق؛ در صورت صلاح دید دستور توقف عملیات مذبور را تا انجام شدن تحقیقات و کارشناسی کافی در خصوص موضوع صادر نموده و مانع از ورود خسارت زیست محیطی گردد.<sup>[۱۰۴]</sup></p>
<p> </p>
<h5>۴) اصل آلوده کننده_ پرداخت کننده</h5>
<p> </p>
<p>یکی از اصول مهم در زمینه حقوق محیط زیست بین الملل اصل آلوده کننده پرداخت کننده می‌باشد. بر خلاف آنچه از عنوان این اصل به ذهن متبادر می شود اجرای این اصل مربوط می شود به قبل از بروز آلودگی. معنا و مفهوم این اصل این است که شخص ذی نفع در یک پروژه اقتصادی یا صنعتی که احتمال ایجاد آلودگی زیست محیطی را دارد، می بایست متقبل هزینه های مربوط به تدابیر پیش گیری از آلودگی مذبور گردد. بدین ترتیب قبل از ورود خسارت زیست محیطی از آلوده کننده احتمالی هزینه های پیش گیری از آن اخذ می‌گردد. با این روش هم از بروز آسیب زیست محیطی جلوگیری به عمل می‌آید و هم هزینه های پیش گیری به مراتب کمتر از هزینه جبران ضرر و زیان ناشی از آلودگی مورد بحث خواهد بود. این اصل تضمین کننده استفاده منطقی از منابع محدود محیط زیست است و مانع از بروز هر گونه تغییر نامطلوب در آن می‌گردد.<sup>[۱۰۵]</sup></p>
</div>
</div><div class="item_footer"><p><small><a href="https://yi.kowsarblog.ir/دانلود-پایان-نامه-و-مقاله-قسمت-17-nn9">مطلب اصلی</a> در <a href="http://kowsarblog.ir/">کوثربلاگ </a>ارسال شده است.</small></p></div>]]></content:encoded>
			</item>

<item rdf:about="https://yi.kowsarblog.ir/پایان-نامه-آماده-کارشناسی-ارشد-۲-۱-۲-مروری-بر-روند-تحوّل-علم-در-ایران">
	<title>پایان نامه آماده کارشناسی ارشد | ۲-۱-۲- مروری بر روند تحوّل علم در ایران – 4</title>
	<link>https://yi.kowsarblog.ir/پایان-نامه-آماده-کارشناسی-ارشد-۲-۱-۲-مروری-بر-روند-تحوّل-علم-در-ایران</link>
	<dc:date>1401-09-23T08:13:00Z</dc:date>	<dc:creator>نویسنده محمدی</dc:creator>
	<dc:subject>بدون موضوع</dc:subject>
		<description>&lt;div class=&#039;story&#039; data-id=&#039;1557146272&#039; data-words=&#039;968&#039; id=&#039;story&#039;&gt;
&lt;div&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;۱-۳-۲- اهداف جزئی پژوهش&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
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&lt;li&gt;تعیین روند تولید علم در &lt;strong&gt;دانشگاه آزاد اسلامی&lt;/strong&gt; در &lt;strong&gt;پایگاه&lt;/strong&gt; &lt;strong&gt;وب‏آوساینس&lt;/strong&gt; در محدوده سال‏های ۱۹۸۵ تا ۲۰۰۹&lt;/li&gt;
&lt;p&gt;&lt;img src=&#039;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2022/11/pics_14_50.png&#039; /&gt;&lt;/p&gt;
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&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
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&lt;li&gt;تعیین زبان تولیدات علمی &lt;strong&gt;دانشگاه آزاد اسلامی &lt;/strong&gt;در &lt;strong&gt;پایگاه&lt;/strong&gt; &lt;strong&gt;وب‏آوساینس&lt;/strong&gt; در محدوده سال‏های ۱۹۸۵ تا ۲۰۰۹&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
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&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
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&lt;li&gt;تعیین نوع تولیدات علمی &lt;strong&gt;دانشگاه آزاد اسلامی&lt;/strong&gt; بر اساس &lt;strong&gt;پایگاه وب‏آوساینس&lt;/strong&gt; در محدوده سال‏های ۱۹۸۵ تا ۲۰۰۹&lt;/li&gt;
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&lt;li&gt;تعیین پوشش موضوعی تولیدات علمی &lt;strong&gt;دانشگاه آزاد اسلامی &lt;/strong&gt;بر اساس &lt;strong&gt;پایگاه وب‏آوساینس&lt;/strong&gt; در محدوده سال‏های ۱۹۸۵ تا ۲۰۰۹&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
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&lt;li&gt;تعیین سهم تولیدات علمی &lt;strong&gt;دانشگاه آزاد اسلامی &lt;/strong&gt;در &lt;strong&gt;پایگاه وب‏آوساینس&lt;/strong&gt; در سال‌های ۱۹۸۵ تا ۲۰۰۹ در مقایسه با کل تولیدات ایران&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;تعیین میزان اثربخشی تولیدات &lt;strong&gt;دانشگاه آزاد اسلامی&lt;/strong&gt; در &lt;strong&gt;پایگاه&lt;/strong&gt; &lt;strong&gt;وب‏آوساینس&lt;/strong&gt; در سال‏های ۱۹۸۵ تا ۲۰۰۹&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;تعیین مجلاتی که بیش‏ترین تولیدات علمی &lt;strong&gt;دانشگاه آزاد اسلامی&lt;/strong&gt; در &lt;strong&gt;پایگاه&lt;/strong&gt; &lt;strong&gt;وب‏آوساینس&lt;/strong&gt; در سال‏های ۱۹۸۵ تا ۲۰۰۹ در آن ها به چاپ رسیده و تعیین ضریب تأثیر آن ها&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;تعیین پرکارترین نویسندگان &lt;strong&gt;دانشگاه آزاد اسلامی&lt;/strong&gt; بر اساس&lt;strong&gt; پایگاه&lt;/strong&gt; &lt;strong&gt;وب‏آوساینس &lt;/strong&gt;در محدوده سال‏های ۱۹۸۵ تا ۲۰۰۹&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;تعیین پراستنادترین نویسندگان &lt;strong&gt;دانشگاه آزاد اسلامی&lt;/strong&gt; بر اساس &lt;strong&gt;پایگاه وب‏آوساینس&lt;/strong&gt; در محدوده سال‏های ۱۹۸۵ تا ۲۰۰۹&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;تعیین میزان مشارکت نویسندگان &lt;strong&gt;دانشگاه آزاد اسلامی&lt;/strong&gt; بر اساس &lt;strong&gt;پایگاه&lt;/strong&gt; &lt;strong&gt;وب‏آوساینس&lt;/strong&gt; در محدوده سال‏های ۱۹۸۵ تا ۲۰۰۹&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;فصل دوم&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;مبانی نظری و پیشینه پژوهش&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;۲-۱- مبانی نظری پژوهش&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;۲-۱-۱- مقدمه&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;درباره علم و تعریف آن دیدگاه های مختلفی ارائه شده است. در &lt;strong&gt;فرهنگ دهخدا &lt;/strong&gt;برای واژه علم، معانی دانستن، یقین کردن، دریافتن، ادراک، استوار کردن، معرفت، دانش، آگاهی و شناسایی به کار برده شده است (دهخدا، ۱۳۳۷). &lt;strong&gt;حیدری&lt;/strong&gt; (۱۳۸۹) معنای علم و دانش را در مراحل ابتدایی با معنای امروزین آن متفاوت دانسته و بیان می‏دارد که علم در آغاز با جادو، خرافه، اخترگویی و دین همراه بوده است.&lt;strong&gt; سروش&lt;/strong&gt; (۱۳۷۹) معتقد به کاربرد دو معنای مختلف برای علم در زبان فارسی و عربی است. معنای اصلی و نخستین علم، دانستن در برابر ندانستن است. در این معنا، همه دانستنی‏ها صرف نظر از نوع آن ها علم نامیده می‏ شود و عالم به کسی گفته می‏ شود که جاهل نباشد. علم در معنای دوم به دانستنی‏هایی گفته می‏ شود که تجربه مستقیم حسی در داوری یا گردآوری آن ها دخالت داشته باشد که در این مفهوم علم در برابر همه دانستنی‏هایی قرار می‏ گیرد که قابل آزمون نیستند. تولد علم به معنی مطلق آگاهی (معنای اول)، هم‏آغاز با تولد بشر است و رشد آن به معنای دوم، از آغاز دوره رنسانس به بعد است. کلمه science در انگلیسی و فرانسه معادل معنای دوم علم می‏ باشد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href=&#039;https://fekreshad.ir/&#039;&gt; &lt;img src=&#039;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/10/THESIS-PAPER-4.png&#039; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;برونوفسکی&lt;/strong&gt;&lt;sup&gt;[۱]&lt;/sup&gt; (۱۳۶۸) علم به صورتی که ما آن را می‏شناسیم مخلوق سیصد سال گذشته می‏داند. به عقیده او این علم در دنیایی ساخته شده است که در حدود سال ۱۶۶۰ هنگامی که اروپا خود را از کابوس طولانی جنگ‏های مذهبی رها می‏ساخت و زندگی خود را بر مبنای تجارت و صنعت آغاز می‏کرد شکل نهایی گرفته است.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;به عقیده &lt;strong&gt;ویلیام&lt;/strong&gt;&lt;sup&gt;[۲]&lt;/sup&gt; و &lt;strong&gt;هال&lt;/strong&gt;&lt;sup&gt;[۳]&lt;/sup&gt; (۱۳۶۳) مهم‏ترین دوره های پیشرفت علمی، دوره یونانیان اسکندرانی، دوره انقلاب علمی در سده هفدهم، دوره مادیگرایی در سده نوزدهم و دوره نوین می‏ باشد. دوره نخست، با علم گذشته‏های دور، به ویژه علم مصری، بابلی و دوران نخستین یونان پیوند دارد. دوره دوّم، با مجموعه‏ای از جنبش‏های سیاسی، نظامی، اقتصادی و دینی به دوره نخست مربوط بوده است. دوره سوّم، علوم ریاضی پیشرفت چشم‏گیر داشته است. دوره چهارم، دوره پیشرفت‏ فنی و رشد سرسام‏آور علم است.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;img src=&#039;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/02/Investment-Economics-178.jpg&#039; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;۲-۱-۲- مروری بر روند تحوّل علم در ایران&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;اندیشه‏های علمی در ایران ریشه‏هایی بس کهن دارد. از حدود هزاره‏های سوّم پیش از میلاد در برخی از جوامع متمدّن واقع در جنوب غربی ایران مانند سومر، بابل و شوش فضای علمی وجود داشته و اندیشه‏ها و ابداعات چشم‏گیری در علوم ریاضی و ستاره‏شناسی و هندسه در حلقه‏های علمی متشکل از کاتبان معابد شکل گرفته است. عصر هخامنشی در ایران باستان یکی از اعصار پررونق ارتباط‏های فرهنگی میان ملّت‏ها بوده است و اعتلای سطح علمی هر جامعه مستلزم این دادوستدهای فرهنگی ‏بوده است. در دوره اشکانیان پایه های سنّت علمی در ایران گذاشته شد. عصر ساسانی از بسیاری جهات عصر باروری فرهنگی در ایران بود. آثار و شواهدی از فرهنگ و علم و هنر در عصر ساسانی آخرین دوره تاریخ ایران پیش از اسلام وجود دارد. سده اوّل و نیمه اوّل سده دوّم هجری عصر تعلیق و تعطیل حکمت در جهان اسلامی بود. نخستین ثمرات تمدن اسلام در نیمه دوّم سده دوّم هجری با سیلان اندیشه‏ها و نوشته ها و با ایجاد مراکز جدید در کنار مراکز فرهنگی قدیم آشکار شد. سده‏های سوّم و چهارم هجری در ممالک اسلامی آکنده از خردگرایی و علم‏طلبی بود و در سده پنج به اوج شکوفایی خود رسید. در نیمه دوّم سده پنجم هجری نخستین نشانه های افول حکمت در جهان اسلام به وجود آمد. از سده دوازدهم میلادی به بعد فرهنگ عقلی از شرق به غرب جریان یافت و این تغییر پس از سده‏های دوازدهم و سیزدهم با شتاب بیشتری همراه بود. قرن هفتم و هشتم و نهم هجری به دلیل یورش مغولان به ایران و یورش تیمور وضع علمی ایران دچار دگرگونی های فراوانی شد. دوره صفویّه دوره انحطاط و بلکه زوال علوم عقلی در ایران است (فرشاد، ۱۳۶۵).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;دوران کوتاه حکومت‏های افشاریّه و زندیّه را، از نظر رشد علمی، باید دنباله دوره صفویّه شمرد، البته با گذشت زمان بار دیگر فعالیّت‏های فکری و عقلی در میان جامعه ایرانی این دوره آغاز گردید. دوره قاجاریه نیز از نظر علمی بسیار فقیر بود، اما در نیمه دوّم قرن سیزدهم هجری موجبات رشد فکری و علمی این دوره به وجود آمد (شمیم، ۱۳۷۴).&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;وضعیّت علم و فن‏آوری در ایران و علل افول ایرانیان، قرن‏هاست که از دغدغه‏های مهم اندیشمندان و پژوهشگران و تعدادی از سیاستمداران ایران محسوب می‏ شود. تحقیقاتی که در سال ۱۳۵۵ با دعوت از یک گروه فرانسوی برای شناخت مسائل تحقیقاتی و علمی انجام گردید و به طرح کانب مشهور شد در راستای تعیین علل افول علمی ایران بود (مضطرزاده، ۱۳۷۹). پس از پیروزی انقلاب اسلامی نیز بررسی وضعیّت علم و فن‏آوری در کشور از طریق طرح‏های پژوهشی و مقاله‏های متعدّد ‌پیگیری شده است.&lt;/p&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div class=&quot;item_footer&quot;&gt;&lt;p&gt;&lt;small&gt;&lt;a href=&quot;https://yi.kowsarblog.ir/پایان-نامه-آماده-کارشناسی-ارشد-۲-۱-۲-مروری-بر-روند-تحوّل-علم-در-ایران&quot;&gt;مطلب اصلی&lt;/a&gt; در &lt;a href=&quot;http://kowsarblog.ir/&quot;&gt;کوثربلاگ &lt;/a&gt;ارسال شده است.&lt;/small&gt;&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;</description>
	<content:encoded><![CDATA[<div class='story' data-id='1557146272' data-words='968' id='story'>
<div>
<p> </p>
<p><strong>۱-۳-۲- اهداف جزئی پژوهش</strong></p>
<p> </p>
<ol>
<li>
<ol>
<li>تعیین روند تولید علم در <strong>دانشگاه آزاد اسلامی</strong> در <strong>پایگاه</strong> <strong>وب‏آوساینس</strong> در محدوده سال‏های ۱۹۸۵ تا ۲۰۰۹</li>
<p><img src='https://ziso.ir/wp-content/uploads/2022/11/pics_14_50.png' /></p>
</ol>
</li>
</ol>
<p> </p>
<ol>
<li>
<ol>
<li>تعیین زبان تولیدات علمی <strong>دانشگاه آزاد اسلامی </strong>در <strong>پایگاه</strong> <strong>وب‏آوساینس</strong> در محدوده سال‏های ۱۹۸۵ تا ۲۰۰۹</li>
</ol>
</li>
</ol>
<p> </p>
<ol>
<li>
<ol>
<li>تعیین نوع تولیدات علمی <strong>دانشگاه آزاد اسلامی</strong> بر اساس <strong>پایگاه وب‏آوساینس</strong> در محدوده سال‏های ۱۹۸۵ تا ۲۰۰۹</li>
</ol>
</li>
</ol>
<p> </p>
<ol>
<li>
<ol>
<li>تعیین پوشش موضوعی تولیدات علمی <strong>دانشگاه آزاد اسلامی </strong>بر اساس <strong>پایگاه وب‏آوساینس</strong> در محدوده سال‏های ۱۹۸۵ تا ۲۰۰۹</li>
</ol>
</li>
</ol>
<p> </p>
<ol>
<li>
<ol>
<li>تعیین سهم تولیدات علمی <strong>دانشگاه آزاد اسلامی </strong>در <strong>پایگاه وب‏آوساینس</strong> در سال‌های ۱۹۸۵ تا ۲۰۰۹ در مقایسه با کل تولیدات ایران</li>
</ol>
</li>
</ol>
<p> </p>
<ol>
<li>
<ol>
<li>تعیین میزان اثربخشی تولیدات <strong>دانشگاه آزاد اسلامی</strong> در <strong>پایگاه</strong> <strong>وب‏آوساینس</strong> در سال‏های ۱۹۸۵ تا ۲۰۰۹</li>
</ol>
</li>
</ol>
<p> </p>
<ol>
<li>
<ol>
<li>تعیین مجلاتی که بیش‏ترین تولیدات علمی <strong>دانشگاه آزاد اسلامی</strong> در <strong>پایگاه</strong> <strong>وب‏آوساینس</strong> در سال‏های ۱۹۸۵ تا ۲۰۰۹ در آن ها به چاپ رسیده و تعیین ضریب تأثیر آن ها</li>
</ol>
</li>
</ol>
<p> </p>
<ol>
<li>
<ol>
<li>تعیین پرکارترین نویسندگان <strong>دانشگاه آزاد اسلامی</strong> بر اساس<strong> پایگاه</strong> <strong>وب‏آوساینس </strong>در محدوده سال‏های ۱۹۸۵ تا ۲۰۰۹</li>
</ol>
</li>
</ol>
<p> </p>
<ol>
<li>
<ol>
<li>تعیین پراستنادترین نویسندگان <strong>دانشگاه آزاد اسلامی</strong> بر اساس <strong>پایگاه وب‏آوساینس</strong> در محدوده سال‏های ۱۹۸۵ تا ۲۰۰۹</li>
</ol>
</li>
</ol>
<p> </p>
<ol>
<li>تعیین میزان مشارکت نویسندگان <strong>دانشگاه آزاد اسلامی</strong> بر اساس <strong>پایگاه</strong> <strong>وب‏آوساینس</strong> در محدوده سال‏های ۱۹۸۵ تا ۲۰۰۹</li>
</ol>
<p><strong>فصل دوم</strong></p>
<p> </p>
<p><strong>مبانی نظری و پیشینه پژوهش</strong></p>
<p> </p>
<p><strong>۲-۱- مبانی نظری پژوهش</strong></p>
<p> </p>
<p><strong>۲-۱-۱- مقدمه</strong></p>
<p> </p>
<p>درباره علم و تعریف آن دیدگاه های مختلفی ارائه شده است. در <strong>فرهنگ دهخدا </strong>برای واژه علم، معانی دانستن، یقین کردن، دریافتن، ادراک، استوار کردن، معرفت، دانش، آگاهی و شناسایی به کار برده شده است (دهخدا، ۱۳۳۷). <strong>حیدری</strong> (۱۳۸۹) معنای علم و دانش را در مراحل ابتدایی با معنای امروزین آن متفاوت دانسته و بیان می‏دارد که علم در آغاز با جادو، خرافه، اخترگویی و دین همراه بوده است.<strong> سروش</strong> (۱۳۷۹) معتقد به کاربرد دو معنای مختلف برای علم در زبان فارسی و عربی است. معنای اصلی و نخستین علم، دانستن در برابر ندانستن است. در این معنا، همه دانستنی‏ها صرف نظر از نوع آن ها علم نامیده می‏ شود و عالم به کسی گفته می‏ شود که جاهل نباشد. علم در معنای دوم به دانستنی‏هایی گفته می‏ شود که تجربه مستقیم حسی در داوری یا گردآوری آن ها دخالت داشته باشد که در این مفهوم علم در برابر همه دانستنی‏هایی قرار می‏ گیرد که قابل آزمون نیستند. تولد علم به معنی مطلق آگاهی (معنای اول)، هم‏آغاز با تولد بشر است و رشد آن به معنای دوم، از آغاز دوره رنسانس به بعد است. کلمه science در انگلیسی و فرانسه معادل معنای دوم علم می‏ باشد.</p>
<p><a href='https://fekreshad.ir/'> <img src='https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/10/THESIS-PAPER-4.png' /></a></p>
<p> </p>
<p><strong>برونوفسکی</strong><sup>[۱]</sup> (۱۳۶۸) علم به صورتی که ما آن را می‏شناسیم مخلوق سیصد سال گذشته می‏داند. به عقیده او این علم در دنیایی ساخته شده است که در حدود سال ۱۶۶۰ هنگامی که اروپا خود را از کابوس طولانی جنگ‏های مذهبی رها می‏ساخت و زندگی خود را بر مبنای تجارت و صنعت آغاز می‏کرد شکل نهایی گرفته است.</p>
<p> </p>
<p>به عقیده <strong>ویلیام</strong><sup>[۲]</sup> و <strong>هال</strong><sup>[۳]</sup> (۱۳۶۳) مهم‏ترین دوره های پیشرفت علمی، دوره یونانیان اسکندرانی، دوره انقلاب علمی در سده هفدهم، دوره مادیگرایی در سده نوزدهم و دوره نوین می‏ باشد. دوره نخست، با علم گذشته‏های دور، به ویژه علم مصری، بابلی و دوران نخستین یونان پیوند دارد. دوره دوّم، با مجموعه‏ای از جنبش‏های سیاسی، نظامی، اقتصادی و دینی به دوره نخست مربوط بوده است. دوره سوّم، علوم ریاضی پیشرفت چشم‏گیر داشته است. دوره چهارم، دوره پیشرفت‏ فنی و رشد سرسام‏آور علم است.</p>
<p><img src='https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/02/Investment-Economics-178.jpg' /></p>
<p><strong>۲-۱-۲- مروری بر روند تحوّل علم در ایران</strong></p>
<p> </p>
<p>اندیشه‏های علمی در ایران ریشه‏هایی بس کهن دارد. از حدود هزاره‏های سوّم پیش از میلاد در برخی از جوامع متمدّن واقع در جنوب غربی ایران مانند سومر، بابل و شوش فضای علمی وجود داشته و اندیشه‏ها و ابداعات چشم‏گیری در علوم ریاضی و ستاره‏شناسی و هندسه در حلقه‏های علمی متشکل از کاتبان معابد شکل گرفته است. عصر هخامنشی در ایران باستان یکی از اعصار پررونق ارتباط‏های فرهنگی میان ملّت‏ها بوده است و اعتلای سطح علمی هر جامعه مستلزم این دادوستدهای فرهنگی ‏بوده است. در دوره اشکانیان پایه های سنّت علمی در ایران گذاشته شد. عصر ساسانی از بسیاری جهات عصر باروری فرهنگی در ایران بود. آثار و شواهدی از فرهنگ و علم و هنر در عصر ساسانی آخرین دوره تاریخ ایران پیش از اسلام وجود دارد. سده اوّل و نیمه اوّل سده دوّم هجری عصر تعلیق و تعطیل حکمت در جهان اسلامی بود. نخستین ثمرات تمدن اسلام در نیمه دوّم سده دوّم هجری با سیلان اندیشه‏ها و نوشته ها و با ایجاد مراکز جدید در کنار مراکز فرهنگی قدیم آشکار شد. سده‏های سوّم و چهارم هجری در ممالک اسلامی آکنده از خردگرایی و علم‏طلبی بود و در سده پنج به اوج شکوفایی خود رسید. در نیمه دوّم سده پنجم هجری نخستین نشانه های افول حکمت در جهان اسلام به وجود آمد. از سده دوازدهم میلادی به بعد فرهنگ عقلی از شرق به غرب جریان یافت و این تغییر پس از سده‏های دوازدهم و سیزدهم با شتاب بیشتری همراه بود. قرن هفتم و هشتم و نهم هجری به دلیل یورش مغولان به ایران و یورش تیمور وضع علمی ایران دچار دگرگونی های فراوانی شد. دوره صفویّه دوره انحطاط و بلکه زوال علوم عقلی در ایران است (فرشاد، ۱۳۶۵).</p>
<p> </p>
<p>دوران کوتاه حکومت‏های افشاریّه و زندیّه را، از نظر رشد علمی، باید دنباله دوره صفویّه شمرد، البته با گذشت زمان بار دیگر فعالیّت‏های فکری و عقلی در میان جامعه ایرانی این دوره آغاز گردید. دوره قاجاریه نیز از نظر علمی بسیار فقیر بود، اما در نیمه دوّم قرن سیزدهم هجری موجبات رشد فکری و علمی این دوره به وجود آمد (شمیم، ۱۳۷۴).</p>
<p> </p>
<p>وضعیّت علم و فن‏آوری در ایران و علل افول ایرانیان، قرن‏هاست که از دغدغه‏های مهم اندیشمندان و پژوهشگران و تعدادی از سیاستمداران ایران محسوب می‏ شود. تحقیقاتی که در سال ۱۳۵۵ با دعوت از یک گروه فرانسوی برای شناخت مسائل تحقیقاتی و علمی انجام گردید و به طرح کانب مشهور شد در راستای تعیین علل افول علمی ایران بود (مضطرزاده، ۱۳۷۹). پس از پیروزی انقلاب اسلامی نیز بررسی وضعیّت علم و فن‏آوری در کشور از طریق طرح‏های پژوهشی و مقاله‏های متعدّد ‌پیگیری شده است.</p>
</div>
</div><div class="item_footer"><p><small><a href="https://yi.kowsarblog.ir/پایان-نامه-آماده-کارشناسی-ارشد-۲-۱-۲-مروری-بر-روند-تحوّل-علم-در-ایران">مطلب اصلی</a> در <a href="http://kowsarblog.ir/">کوثربلاگ </a>ارسال شده است.</small></p></div>]]></content:encoded>
			</item>

<item rdf:about="https://yi.kowsarblog.ir/مقاله-های-علمی-دانشگاهی-n-۲-۱۷-نه-قدم-اصلی-شخصی-سازی-یادگیری-nn9">
	<title>مقاله های علمی- دانشگاهی – ۲-۱۷- نه قدم اصلی شخصی سازی یادگیری – 9</title>
	<link>https://yi.kowsarblog.ir/مقاله-های-علمی-دانشگاهی-n-۲-۱۷-نه-قدم-اصلی-شخصی-سازی-یادگیری-nn9</link>
	<dc:date>1401-09-23T08:13:00Z</dc:date>	<dc:creator>نویسنده محمدی</dc:creator>
	<dc:subject>بدون موضوع</dc:subject>
		<description>&lt;div class=&#039;story&#039; data-id=&#039;1557091180&#039; data-words=&#039;1054&#039; id=&#039;story&#039;&gt;
&lt;div&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;h3&gt;۲-۱۶-۳-یادگیری ساختار دانش و توانایی حل مشکل&lt;/h3&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;هدف از آموزش، تبدیل دانش آموز یا بهتر بگوییم شهروند به فردی با قدرت تصمیم گیری بالا و حل کننده خلاق مشکلات است که توان انطباق یافتن با قرن ۲۱ را داشته باشد. افزون بر این، با توجه به رقابت غیر قابل اجتناب جهانی، هر کشوری مجبور است نظام آموزشی خود را طوری تغییر دهد که تمامی شهروندانش بتوانند آموزش‌های جدید را در کل مدت حیات یاد بگیرند یا دانش قدیمی خود را روزآمد کنند. این مدل در کشورهای آسیایی نظیر تایوان، هنگ کنگ، سنگاپور اجرا شده و در نظام آموزشی آن ها اصطلاحات اساسی به وجود آورده است. در این مدل، علاوه بر آموختن مهارت‌های پایه همانند نوشتن و خواندن، توانایی حل مشکل و مهارت‌های عرضه تخصص خود در اجتماع، نیز آموزش داده می‌شود و سبب گسترش اهداف آموزشی شده است. پس به طور کلی محتوا و اهداف آموزشی دچار تحول می‌گردد. تفاوت‌های فردی و به کارگیری هوش و خلاقیت پس از آموزش کلیات دانش مورد توجه قرار می‌گیرند.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;img src=&#039;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2022/11/zyro-image.png&#039; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;img src=&#039;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/02/Intelligence-83.jpg&#039; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href=&#039;https://feko.ir/&#039;&gt; &lt;img src=&#039;https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/10/THESIS-PAPER-2.png&#039; /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3&gt;۲-۱۶-۴- یادگیری مبتنی بر جامعه&lt;/h3&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;آخرین مدل یادگیری، به صورت یادگیری مبتنی بر جامعه می‌باشد. همان‌ طور که در عامل واقعی با جوامع سرو کار داریم، کاربران اینترنت، اقدام به ایجاد جوامعی نموده‌اند که دارای زبان، عادات و فرهنگ خود هستند. (والکیس&lt;sup&gt;[۶۳]&lt;/sup&gt;، ۱۹۹۹، نقل از محمدی و نجفی، ۱۳۸۷) برای این مسئله و ایجاد یک جامعه شبکه‌ای و وارد کردن فعالیت‌های آموزشی در آن ، لازم است که ‌به این حالت از آموزش، یادگیری مبتنی بر جامعه اطلاق شود. (محمدی و نجفی، ۱۳۸۷)&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;h2&gt;۲-۱۷- نه قدم اصلی شخصی سازی یادگیری&lt;/h2&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;بر اساس مطالعات انجام شده توسط منابع مختلف برروی موضوع شخصی سازی یادگیری ۹ پارامتر اصلی به عنوان پارامترهای مطرح، مطالعه و برای این ۹ آیتم یک چرخه عمر ایجاد گردید. مطالعه ایشان بر روی مطالعه شخصیت افراد در حین ارائه کنفرانس و نیز جلسات مدارس شروع شده بود. ایشان پس از انجام مطالعات گسترده بر روی پارامترها ‌به این نتیجه رسیدند که ما بین پارامترهای مورد نظر روابطی به غیر از آنچه در چرخه ایجاد شده است موجود می‌باشند. و برخی از پارامترها بیش از پیش با همدیگر مرتبط هستند . (هارگریوز&lt;sup&gt;[۶۴]&lt;/sup&gt;، ۲۰۰۶)&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;صدای دانش آموز&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;آم&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;یادگیری عمیق رهبری عمیق&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;مشاوره و راهنمایی&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;آم&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;طراحی و سازمان دهی&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;آم&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;یادگیری برای یادگیری&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;آم&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;ارزیابی برای یادگیری&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;تجربه عمیق پشتیبانی&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;مشاوره و مربیگری&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;آم&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;تکنولوژی جدید&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;آم&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;مشاوره و راهنمایی&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;آم&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;برنامه درسی&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;آم&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;h4&gt;نمودار ۲-۲ نه قدم شخصی سازی یادگیری&lt;/h4&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;h2&gt;۲-۱۸- مفهوم یادگیری&lt;/h2&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;یادگیری را می‌توان به صورت مختلفی از جمله کسب اطلاعات و تفکرات جدید، عادت‌های مختلف، مهارت‌های گوناگون و راه‌های متنوع حل مسئله و همچنین کسب رفتار و اعمال پسندیده و یا حتی ناپسند تعریف نمود. این در حالی است که هرگنهان و السون &lt;sup&gt;[۶۵]&lt;/sup&gt; معتقدند یادگیری با وجودی که یکی از مهم‌ترین زمینه‌ها در علم روانشناسی به حساب می‌آید از مشکل ترین مفاهیم برای تعریف نیز می‌باشد اما آنچه که به عنوان معروف ترین تعریف یادگیری شناخته شده است:&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;یادگیری به فرایند ایجاد تغییرات نسبتاً پایدار در رفتار یا توان رفتاری که حاصل تجربه است گفته می‌شود و نمی‌توان آن را به حالت‌های موقتی بدن مانند آنچه بر اثر بیماری، خستگی یا داروها پدید می‌آید نسبت داد . (هرگنهان و السون، ترجمه سیف ۱۳۹۱، ص ۶۰)&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;تعریف گانیه از یادگیری نیز بسیار شبیه تعریف فوق می‌باشد: یادگیری تغییری است که در توانایی انسان ایجاد می‌شود و برای مدتی باقی می‌ماند و نمی‌توان آن را به سادگی به فرآیندهای رشد و نمو نسبت داد. هم چنین یادگیری با آموزش تفاوت دارد. آموزش را صاحب نظران به عنوان فعالیت‌هایی تعریف کرده‌اند که با هدف آسان ساختن یادگیری از سوی مدرس طرح ریزی می‌شود، و بین مدرس و یک یادگیرنده به صورت کنش متقابل جریان می‌یابد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;بدین ترتیب مشخص می‌شود که یادگیری همیشه معطوف به یادگیرنده است اما آموزش وسیله رسیدن به یادگیری (هدف) است . معلم در آموزش تسهیل کننده یادگیری است ولی یادگیری فعالیتی است که فقط منوط به یادگیرنده و تمایلات و خواسته‌های او برای یادگیری می‌باشد. و یادگیری زمانی اتفاق می‌افتد که موقعیت محرک همراه با محتوای حافظه بر یاد گیرنده به گونه ای تاثیر گذارد که عملکرد او بعد از قرار گرفتن در آن موقعیت نسبت به قبل از آن تغییر یابد. این تغییر در عملکرد همان چیزی است که ما را ‌به این استنباط که یادگیری اتفاق افتاده است، هدایت می‌کند . (گانیه، ترجمه نجفی زند ۱۳۷۳، ص ۳۴)&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;آنچه ما را از وقوع یادگیری مطلع می‌سازد رفتار قابل مشاهده فرد است که به آن عملکرد نیز گفته می‌شود .در حقیقت مقیاس ما جهت سنجش وقوع یادگیری عملکرد فرد است.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;h2&gt;۲-۱۹- محورهای اساسی یادگیری&lt;/h2&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;یونسکو&lt;sup&gt;[۶۶]&lt;/sup&gt; به منظور تحقق توسعه‌ انسانی برای تعلیم و تربیت در قرن بیست و یکم چهار محور اساسی را برای یادگیری پیشنهاد می ‌دهد تا بر اساس آن پایه های دانش در طول زندگی اشخاص شکل بگیرد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;این چهار محور به شرح زیر است :&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;۱-“یادگیری چگونه دانستن” که ابزارهای درک و شناخت را در اختیار می‌گذارد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;۲-“یادگیری چگونه انجام دادن” به گونه ای که بتوان در محیط به صورت خلاق عمل کرد.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;۳-“یادگیری زندگی با دیگران” به گونه‌ای که بتوان در تمامی فعالیت‌های بشری با افراد دیگر مشارکت و همکاری داشت.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;۴-“یادگیری چگونه بودن” پیشرفتی که ناشی از سه مرحله قبلی است . (یونسکو، ۱۳۷۶، ص ۸۸)&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;h2&gt;۲-۲۰- اهمیت یادگیری&lt;/h2&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;از آنجا که اکثریت رفتارهای آدمی یاد گرفته می‌شوند، بررسی اصول یادگیری به ما کمک می‌کند تا علت‌های رفتارمان را بفهمیم. آگاهی از فرایند یادگیری نه تنها در فهم رفتار بهنجار و انطباقی به ما کمک می‌کند بلکه امکان درک بیشتر شرایطی که منجر به رفتار ناسازگار می‌شود را نیز به ما می‌دهد و در نتیجه روش‌های موثرتر روان درمانی را به وجود می‌آورد. افزون بر این، بین اصول یادگیری و روش‌های آموزشی رابطه نزدیکی وجود دارد. در بسیاری از موارد، اصول حاصل از پژوهش‌های یادگیری آزمایشگاهی در کلاس درس مورد استفاده قرار گرفته‌اند. کاربرد وسیع یادگیری برنامه‌ای، ماشین‌های آموزشی و آموزش کامپیوتری ۳ مثال از چگونگی تاثیر پژوهش بر روش‌های آموزشی هستند .روند جاری آموزش و پرورش به سوی نظام‌های آموزشی مشخص یا آموزش فردی را نیز می‌توان محصول پژوهش‌های مربوط بر فرایند یادگیری دانست ما می‌توانیم به طور منطقی نتیجه گیری کنیم که پا به پای افزایش دانش ما از فرایند یادگیری، روش‌های آموزشی نیز کارآمدتر و اثر بخش تر خواهند شد. (هرگنهان، &lt;sup&gt;[۶۷]&lt;/sup&gt;۱۳۷۷، به نقل از براری ۱۳۸۶)&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;h2&gt;۲-۲۱- شرایط یادگیری&lt;/h2&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;به اعتقاد گانیه، یادگیری محصول دو دسته از شرایط می‌باشد:&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;۱-شرایط درونی&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;/p&gt;
&lt;p&gt;۲-شرایط بیرونی&lt;/p&gt;
&lt;/div&gt;
&lt;/div&gt;&lt;div class=&quot;item_footer&quot;&gt;&lt;p&gt;&lt;small&gt;&lt;a href=&quot;https://yi.kowsarblog.ir/مقاله-های-علمی-دانشگاهی-n-۲-۱۷-نه-قدم-اصلی-شخصی-سازی-یادگیری-nn9&quot;&gt;مطلب اصلی&lt;/a&gt; در &lt;a href=&quot;http://kowsarblog.ir/&quot;&gt;کوثربلاگ &lt;/a&gt;ارسال شده است.&lt;/small&gt;&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;</description>
	<content:encoded><![CDATA[<div class='story' data-id='1557091180' data-words='1054' id='story'>
<div>
<p> </p>
<h3>۲-۱۶-۳-یادگیری ساختار دانش و توانایی حل مشکل</h3>
<p> </p>
<p>هدف از آموزش، تبدیل دانش آموز یا بهتر بگوییم شهروند به فردی با قدرت تصمیم گیری بالا و حل کننده خلاق مشکلات است که توان انطباق یافتن با قرن ۲۱ را داشته باشد. افزون بر این، با توجه به رقابت غیر قابل اجتناب جهانی، هر کشوری مجبور است نظام آموزشی خود را طوری تغییر دهد که تمامی شهروندانش بتوانند آموزش‌های جدید را در کل مدت حیات یاد بگیرند یا دانش قدیمی خود را روزآمد کنند. این مدل در کشورهای آسیایی نظیر تایوان، هنگ کنگ، سنگاپور اجرا شده و در نظام آموزشی آن ها اصطلاحات اساسی به وجود آورده است. در این مدل، علاوه بر آموختن مهارت‌های پایه همانند نوشتن و خواندن، توانایی حل مشکل و مهارت‌های عرضه تخصص خود در اجتماع، نیز آموزش داده می‌شود و سبب گسترش اهداف آموزشی شده است. پس به طور کلی محتوا و اهداف آموزشی دچار تحول می‌گردد. تفاوت‌های فردی و به کارگیری هوش و خلاقیت پس از آموزش کلیات دانش مورد توجه قرار می‌گیرند.</p>
<p><img src='https://ziso.ir/wp-content/uploads/2022/11/zyro-image.png' /></p>
<p><img src='https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/02/Intelligence-83.jpg' /></p>
<p><a href='https://feko.ir/'> <img src='https://ziso.ir/wp-content/uploads/2021/10/THESIS-PAPER-2.png' /></a></p>
<h3>۲-۱۶-۴- یادگیری مبتنی بر جامعه</h3>
<p> </p>
<p>آخرین مدل یادگیری، به صورت یادگیری مبتنی بر جامعه می‌باشد. همان‌ طور که در عامل واقعی با جوامع سرو کار داریم، کاربران اینترنت، اقدام به ایجاد جوامعی نموده‌اند که دارای زبان، عادات و فرهنگ خود هستند. (والکیس<sup>[۶۳]</sup>، ۱۹۹۹، نقل از محمدی و نجفی، ۱۳۸۷) برای این مسئله و ایجاد یک جامعه شبکه‌ای و وارد کردن فعالیت‌های آموزشی در آن ، لازم است که ‌به این حالت از آموزش، یادگیری مبتنی بر جامعه اطلاق شود. (محمدی و نجفی، ۱۳۸۷)</p>
<p> </p>
<h2>۲-۱۷- نه قدم اصلی شخصی سازی یادگیری</h2>
<p> </p>
<p>بر اساس مطالعات انجام شده توسط منابع مختلف برروی موضوع شخصی سازی یادگیری ۹ پارامتر اصلی به عنوان پارامترهای مطرح، مطالعه و برای این ۹ آیتم یک چرخه عمر ایجاد گردید. مطالعه ایشان بر روی مطالعه شخصیت افراد در حین ارائه کنفرانس و نیز جلسات مدارس شروع شده بود. ایشان پس از انجام مطالعات گسترده بر روی پارامترها ‌به این نتیجه رسیدند که ما بین پارامترهای مورد نظر روابطی به غیر از آنچه در چرخه ایجاد شده است موجود می‌باشند. و برخی از پارامترها بیش از پیش با همدیگر مرتبط هستند . (هارگریوز<sup>[۶۴]</sup>، ۲۰۰۶)</p>
<p> </p>
<p>صدای دانش آموز</p>
<p> </p>
<p>آم</p>
<p> </p>
<p>یادگیری عمیق رهبری عمیق</p>
<p> </p>
<p>مشاوره و راهنمایی</p>
<p> </p>
<p>آم</p>
<p> </p>
<p>طراحی و سازمان دهی</p>
<p> </p>
<p>آم</p>
<p> </p>
<p>یادگیری برای یادگیری</p>
<p> </p>
<p>آم</p>
<p> </p>
<p>ارزیابی برای یادگیری</p>
<p> </p>
<p>تجربه عمیق پشتیبانی</p>
<p> </p>
<p>مشاوره و مربیگری</p>
<p> </p>
<p>آم</p>
<p> </p>
<p>تکنولوژی جدید</p>
<p> </p>
<p>آم</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p>مشاوره و راهنمایی</p>
<p> </p>
<p>آم</p>
<p> </p>
<p>برنامه درسی</p>
<p> </p>
<p>آم</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<h4>نمودار ۲-۲ نه قدم شخصی سازی یادگیری</h4>
<p> </p>
<h2>۲-۱۸- مفهوم یادگیری</h2>
<p> </p>
<p>یادگیری را می‌توان به صورت مختلفی از جمله کسب اطلاعات و تفکرات جدید، عادت‌های مختلف، مهارت‌های گوناگون و راه‌های متنوع حل مسئله و همچنین کسب رفتار و اعمال پسندیده و یا حتی ناپسند تعریف نمود. این در حالی است که هرگنهان و السون <sup>[۶۵]</sup> معتقدند یادگیری با وجودی که یکی از مهم‌ترین زمینه‌ها در علم روانشناسی به حساب می‌آید از مشکل ترین مفاهیم برای تعریف نیز می‌باشد اما آنچه که به عنوان معروف ترین تعریف یادگیری شناخته شده است:</p>
<p> </p>
<p>یادگیری به فرایند ایجاد تغییرات نسبتاً پایدار در رفتار یا توان رفتاری که حاصل تجربه است گفته می‌شود و نمی‌توان آن را به حالت‌های موقتی بدن مانند آنچه بر اثر بیماری، خستگی یا داروها پدید می‌آید نسبت داد . (هرگنهان و السون، ترجمه سیف ۱۳۹۱، ص ۶۰)</p>
<p> </p>
<p>تعریف گانیه از یادگیری نیز بسیار شبیه تعریف فوق می‌باشد: یادگیری تغییری است که در توانایی انسان ایجاد می‌شود و برای مدتی باقی می‌ماند و نمی‌توان آن را به سادگی به فرآیندهای رشد و نمو نسبت داد. هم چنین یادگیری با آموزش تفاوت دارد. آموزش را صاحب نظران به عنوان فعالیت‌هایی تعریف کرده‌اند که با هدف آسان ساختن یادگیری از سوی مدرس طرح ریزی می‌شود، و بین مدرس و یک یادگیرنده به صورت کنش متقابل جریان می‌یابد.</p>
<p> </p>
<p>بدین ترتیب مشخص می‌شود که یادگیری همیشه معطوف به یادگیرنده است اما آموزش وسیله رسیدن به یادگیری (هدف) است . معلم در آموزش تسهیل کننده یادگیری است ولی یادگیری فعالیتی است که فقط منوط به یادگیرنده و تمایلات و خواسته‌های او برای یادگیری می‌باشد. و یادگیری زمانی اتفاق می‌افتد که موقعیت محرک همراه با محتوای حافظه بر یاد گیرنده به گونه ای تاثیر گذارد که عملکرد او بعد از قرار گرفتن در آن موقعیت نسبت به قبل از آن تغییر یابد. این تغییر در عملکرد همان چیزی است که ما را ‌به این استنباط که یادگیری اتفاق افتاده است، هدایت می‌کند . (گانیه، ترجمه نجفی زند ۱۳۷۳، ص ۳۴)</p>
<p> </p>
<p>آنچه ما را از وقوع یادگیری مطلع می‌سازد رفتار قابل مشاهده فرد است که به آن عملکرد نیز گفته می‌شود .در حقیقت مقیاس ما جهت سنجش وقوع یادگیری عملکرد فرد است.</p>
<p> </p>
<h2>۲-۱۹- محورهای اساسی یادگیری</h2>
<p> </p>
<p>یونسکو<sup>[۶۶]</sup> به منظور تحقق توسعه‌ انسانی برای تعلیم و تربیت در قرن بیست و یکم چهار محور اساسی را برای یادگیری پیشنهاد می ‌دهد تا بر اساس آن پایه های دانش در طول زندگی اشخاص شکل بگیرد.</p>
<p> </p>
<p>این چهار محور به شرح زیر است :</p>
<p> </p>
<p>۱-“یادگیری چگونه دانستن” که ابزارهای درک و شناخت را در اختیار می‌گذارد.</p>
<p> </p>
<p>۲-“یادگیری چگونه انجام دادن” به گونه ای که بتوان در محیط به صورت خلاق عمل کرد.</p>
<p> </p>
<p>۳-“یادگیری زندگی با دیگران” به گونه‌ای که بتوان در تمامی فعالیت‌های بشری با افراد دیگر مشارکت و همکاری داشت.</p>
<p> </p>
<p>۴-“یادگیری چگونه بودن” پیشرفتی که ناشی از سه مرحله قبلی است . (یونسکو، ۱۳۷۶، ص ۸۸)</p>
<p> </p>
<h2>۲-۲۰- اهمیت یادگیری</h2>
<p> </p>
<p>از آنجا که اکثریت رفتارهای آدمی یاد گرفته می‌شوند، بررسی اصول یادگیری به ما کمک می‌کند تا علت‌های رفتارمان را بفهمیم. آگاهی از فرایند یادگیری نه تنها در فهم رفتار بهنجار و انطباقی به ما کمک می‌کند بلکه امکان درک بیشتر شرایطی که منجر به رفتار ناسازگار می‌شود را نیز به ما می‌دهد و در نتیجه روش‌های موثرتر روان درمانی را به وجود می‌آورد. افزون بر این، بین اصول یادگیری و روش‌های آموزشی رابطه نزدیکی وجود دارد. در بسیاری از موارد، اصول حاصل از پژوهش‌های یادگیری آزمایشگاهی در کلاس درس مورد استفاده قرار گرفته‌اند. کاربرد وسیع یادگیری برنامه‌ای، ماشین‌های آموزشی و آموزش کامپیوتری ۳ مثال از چگونگی تاثیر پژوهش بر روش‌های آموزشی هستند .روند جاری آموزش و پرورش به سوی نظام‌های آموزشی مشخص یا آموزش فردی را نیز می‌توان محصول پژوهش‌های مربوط بر فرایند یادگیری دانست ما می‌توانیم به طور منطقی نتیجه گیری کنیم که پا به پای افزایش دانش ما از فرایند یادگیری، روش‌های آموزشی نیز کارآمدتر و اثر بخش تر خواهند شد. (هرگنهان، <sup>[۶۷]</sup>۱۳۷۷، به نقل از براری ۱۳۸۶)</p>
<p> </p>
<h2>۲-۲۱- شرایط یادگیری</h2>
<p> </p>
<p>به اعتقاد گانیه، یادگیری محصول دو دسته از شرایط می‌باشد:</p>
<p> </p>
<p>۱-شرایط درونی</p>
<p> </p>
<p>۲-شرایط بیرونی</p>
</div>
</div><div class="item_footer"><p><small><a href="https://yi.kowsarblog.ir/مقاله-های-علمی-دانشگاهی-n-۲-۱۷-نه-قدم-اصلی-شخصی-سازی-یادگیری-nn9">مطلب اصلی</a> در <a href="http://kowsarblog.ir/">کوثربلاگ </a>ارسال شده است.</small></p></div>]]></content:encoded>
			</item>
</rdf:RDF>
